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NEET पेपर लीक के बाद सख्त हुआ सिस्टम, अब PMO करेगा री-एग्जाम की हर स्टेप पर निगरानी

NEET पेपर लीक विवाद के बाद सरकार 21 जून को होने वाली री-परीक्षा को लेकर बेहद सतर्क है. इस बार सुरक्षा पुख्ता करने के लिए प्रश्नपत्र तैयार होने से लेकर बंटने तक पूरी प्रक्रिया की निगरानी सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा की जाएगी.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
NEET पेपर लीक के बाद सख्त हुआ सिस्टम, अब PMO करेगा री-एग्जाम की हर स्टेप पर निगरानी
Courtesy: social media

NEET-UG 2026 re-examination: नीट पेपर लीक विवाद के बाद अब भारत सरकार आने वाली नीट री-एग्जाम को लेकर बेहद सतर्क हो गई है. सरकार ने परीक्षा की सुरक्षा और निगरानी को कई गुना बढ़ाने का फैसला किया है ताकि इस बार किसी भी तरह की गड़बड़ी या धांधली की गुंजाइश न रहे.

इसी सिलसिले में हाल ही में दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के घर पर एक हाई-लेवल बैठक हुई है. इस बैठक में 21 जून को होने वाली नीट री-परीक्षा के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजामों पर चर्चा की गई है. आपको बता दें कि इस दोबारा होने वाली परीक्षा में करीब 23 लाख छात्रों के शामिल होने की उम्मीद है.

पीएमओ से रखी जाएगी नजर

सरकारी सूत्रों के अनुसार इस बार प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारी परीक्षा की पूरी प्रक्रिया पर सीधे नजर रखेंगे. पेपर तैयार करने से लेकर, उसकी छपाई, उसे सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने और परीक्षा केंद्रों तक बांटने तक हर एक कदम की बारीकी से निगरानी की जाएगी. यह पहरा तब तक रहेगा जब तक कि आखिरी छात्र के हाथ में भी प्रश्नपत्र नहीं पहुंच जाता.

करीब 40 मिनट तक चली इस अहम बैठक में सरकार के कई बड़े मंत्री और अधिकारी शामिल हुए. बैठक में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह और पीएमओ के शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे.

पीएम मोदी रखेंगे हर अपडेट पर नजर

सूत्रों ने यह भी बताया है कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस परीक्षा से जुड़े हर अपडेट पर नजर रख रहे हैं. उन्हें परीक्षा की तैयारियों और सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त को लेकर लगातार जानकारी दी जा रही है. इससे पहले हुई नीट परीक्षा को देश भर में मचे भारी बवाल और पेपर लीक की खबरों के बाद रद्द करना पड़ा था. छात्रों, अभिभावकों और राजनीतिक दलों ने इस देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए थे.

इसी भारी दबाव के बीच सरकार का पूरा ध्यान अब सुरक्षा में होने वाली किसी भी चूक को रोकने पर है. अधिकारी गोपनीय दस्तावेजों की सुरक्षा और उनके ट्रांसपोर्टेशन की कड़ाई से समीक्षा कर रहे हैं. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान लगातार तैयारियों का जायजा ले रहे हैं और कई सरकारी एजेंसियां मिलकर सुरक्षा को मजबूत करने में जुटी हैं. अधिकारियों का मानना है कि यह नया सिस्टम भारत के इतिहास में अब तक का सबसे सख्त एग्जाम सिक्योरिटी सिस्टम साबित हो सकता है जिससे छात्रों का भरोसा फिर से जीता जा सके.