उच्च शिक्षा के लिए जब कोई छात्र विदेश जाने का सपना देखता है, तो उसका पहला विचार अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया या यूरोप जैसे देशों की ओर जाता है. लेकिन अब यह ट्रेंड तेजी से बदल रहा है. एशिया की यूनिवर्सिटीज न सिर्फ वर्ल्ड-क्लास एजुकेशन दे रही हैं, बल्कि अपनी रिसर्च, इनोवेशन और इंडस्ट्री-रेडी प्रोग्राम्स के दम पर दुनिया भर के छात्रों को आकर्षित कर रही हैं. भारत, नेपाल, बांग्लादेश और अन्य एशियाई देशों से हर साल हजारों छात्र हांगकांग, सिंगापुर और चीन जैसे देशों की यूनिवर्सिटीज में एडमिशन ले रहे हैं.
सबसे बड़ी बात यह है कि यहां शिक्षा की गुणवत्ता पश्चिमी देशों जैसी है, लेकिन फीस काफी कम है, जिससे यह छात्रों के लिए एक किफायती और प्रैक्टिकल विकल्प बन गया है. इसके साथ ही, एशिया की यूनिवर्सिटीज अब ग्लोबल रैंकिंग में लगातार ऊंचा स्थान हासिल कर रही हैं. इन संस्थानों में आधुनिक लैब्स, इंटरनेशनल फैकल्टी और बहुभाषी स्टूडेंट वातावरण छात्रों को एक अनूठा सीखने का अनुभव प्रदान करता है. यही वजह है कि एशिया अब सिर्फ भूगोल नहीं, बल्कि शिक्षा का नया पावर सेंटर बन गया है.
क्यूएस क्वाक्वेरेली साइमंड्स ने हाल ही में QS Asia University Rankings 2026 जारी की है. इस रैंकिंग में 25 क्षेत्रीय शिक्षा प्रणालियों की 1529 यूनिवर्सिटीज को शामिल किया गया है, जिनमें से 558 संस्थान पहली बार इस सूची में आए हैं. लगातार 17वें वर्ष यह रैंकिंग जारी की गई है और इस बार हांगकांग ने अपना दबदबा बनाए रखा है. यूनिवर्सिटी ऑफ हांगकांग को एशिया की नंबर-1 यूनिवर्सिटी घोषित किया गया है. यह संस्था अपने रिसर्च, रोजगार दर, फैकल्टी क्वालिटी और स्टूडेंट सैटिस्फैक्शन के लिए शीर्ष पर रही है.
इस बार टॉप-10 में शामिल यूनिवर्सिटीज में से 5 हांगकांग की हैं, जिससे साफ है कि हांगकांग अब एशिया का नया शिक्षा केंद्र बन चुका है. यहां की यूनिवर्सिटीज आधुनिक शिक्षा प्रणाली, इंडस्ट्री-इंटीग्रेटेड कोर्स और इंटरनेशनल एक्सपोजर के लिए जानी जाती हैं. खास बात यह है कि यहां की डिग्रीज़ ग्लोबल लेवल पर मान्य हैं और छात्रों को रिसर्च व इंटरर्नशिप के भरपूर मौके मिलते हैं.
अगर आप यूजी या पीजी में एडमिशन की सोच रहे हैं, तो हांगकांग आपके लिए एक शानदार विकल्प हो सकता है.