हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन करे. लेकिन आजकल कई बच्चे पढ़ाई में रुचि नहीं दिखाते. इसका कारण हमेशा आलस्य नहीं होता, बल्कि अक्सर उनका ध्यान भटक जाता है या पढ़ाई का तरीका उन्हें उबाऊ लगता है. ऐसे में डांटने के बजाय समझदारी से काम लेना चाहिए. बच्चों को पढ़ाई के प्रति आकर्षित करने के लिए थोड़ा तरीका बदलना ही काफी होता है.
अगर आपका बच्चा बार-बार पढ़ाई से भागता है या ध्यान नहीं लगा पाता, तो चिंता करने की ज़रूरत नहीं है. कुछ आसान ट्रिक्स और थोड़ी समझदारी से आप इस समस्या को हल कर सकते हैं. सही माहौल, सही दिनचर्या और रोचक पढ़ाई के तरीके बच्चों को पढ़ाई के प्रति प्रेरित कर सकते हैं. आइए जानें वो आसान टिप्स जो आपके बच्चे का मन दोबारा पढ़ाई में लगा सकते हैं.
बच्चों के लिए एक शांत और प्रेरक माहौल जरूरी होता है. उनके कमरे को साफ-सुथरा रखें और पढ़ाई की जगह को रोशनी व ताजी हवा से भरपूर बनाएं. इससे मन एकाग्र रहता है.
हर बच्चे के लिए एक संतुलित टाइमटेबल बनाएं जिसमें पढ़ाई के साथ खेलने और आराम का समय भी शामिल हो. लगातार पढ़ाई करने से ऊब बढ़ती है, इसलिए बीच-बीच में छोटे ब्रेक दें.
कठिन विषयों को गेम, कहानियों या विजुअल लर्निंग के माध्यम से पढ़ाने की कोशिश करें. इससे बच्चे को विषय समझने में आसानी होगी और उसकी रुचि भी बनी रहेगी.
बच्चों को डांटने या तुलना करने की बजाय, उनकी छोटी-छोटी उपलब्धियों की तारीफ करें. प्रेरणा और पॉजिटिव माहौल से बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ता है और वह पढ़ाई के प्रति गंभीर होता है.
बच्चों के दिमाग और शरीर को सक्रिय रखने के लिए पौष्टिक आहार जरूरी है. जंक फूड और ज्यादा शुगर वाले खाद्य पदार्थ से बचें. फलों, दूध और हरी सब्जियों को रोजाना आहार में शामिल करें ताकि उनकी एकाग्रता बनी रहे.
नींद की कमी से बच्चों का ध्यान और याददाश्त दोनों प्रभावित होती हैं. उन्हें रोज कम से कम 8 से 9 घंटे की नींद दिलवाएं. जब शरीर और दिमाग आराम करता है, तब पढ़ाई में रुचि अपने आप बढ़ती है.
अधिक मोबाइल और टीवी देखने से बच्चों का ध्यान भटकता है. उनके स्क्रीन टाइम को सीमित करें और केवल शैक्षणिक सामग्री के लिए ही उपयोग करने दें. इससे उनकी एकाग्रता बनी रहती है.
हर बच्चा अलग होता है. किसी को मैथ्स पसंद होता है, तो किसी को आर्ट. बच्चे की रुचि को पहचानें और उसी दिशा में पढ़ाई का तरीका अपनाएं. जब विषय रुचिकर होता है, तो पढ़ाई बोझ नहीं लगती.
बच्चे को छोटे-छोटे लक्ष्य दें, जैसे रोज 2 पेज पढ़ना या एक चैप्टर समझना. इससे बच्चे में आत्मविश्वास बढ़ता है और उसे उपलब्धि की भावना होती है. धीरे-धीरे यह आदत उसे अनुशासित बना देगी.