नई दिल्ली: केंद्रीय बजट 2026–27 में खाद्य और पेय उद्योग के लिए कई अहम बदलाव पेश किए गए हैं. यह बजट सिर्फ घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि रेस्टोरेंट, कैफे, स्ट्रीट फूड विक्रेताओं और फूड प्रोसेसिंग कंपनियों को भी सीधे प्रभावित करता है.
कुछ फैसले स्वच्छ ऊर्जा, घरेलू विनिर्माण और निर्यात को बढ़ावा देते हैं, जबकि कुछ बदलावों से परिचालन लागत बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है.
बजट में बायोगैस के पूरे मूल्य को केंद्रीय उत्पाद शुल्क की गणना से बाहर रखने का प्रस्ताव किया गया है. इससे बायोगैस मिश्रित CNG का उत्पादन सस्ता होगा और यह पारंपरिक ईंधन के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी बनेगा. इस फैसले से कृषि और स्वच्छ ऊर्जा के बीच मजबूत जुड़ाव बनेगा. किसान अब फसल अवशेष, गोबर और जैविक कचरे की आपूर्ति से अतिरिक्त आय कमा सकेंगे.
घरेलू उपभोक्ताओं और फूड सर्विस उद्योग के लिए राहत की खबर यह है कि माइक्रोवेव ओवन के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कुछ पुर्जों पर बेसिक कस्टम ड्यूटी हटा दी गई है. सरकार का उद्देश्य देश में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है. इससे आयात पर निर्भरता घटेगी और उत्पादन लागत कम होने से माइक्रोवेव ओवन की कीमतें नीचे आ सकती हैं.
सीफूड निर्यातकों के लिए बजट में बड़ा कदम उठाया गया है. सीफूड प्रोसेसिंग में इस्तेमाल होने वाले इनपुट्स के लिए ड्यूटी फ्री आयात सीमा 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 3 प्रतिशत कर दी गई है. इससे कच्चे माल और उपकरणों की सोर्सिंग में अधिक लचीलापन मिलेगा. लागत घटने के साथ भारतीय सीफूड की वैश्विक प्रतिस्पर्धा भी मजबूत होने की उम्मीद है.
शराब विक्रेताओं के लिए TCS को एक समान 2 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे टैक्स प्रक्रिया सरल होगी. हालांकि, खुदरा कीमतों पर इसका सीधा असर नहीं पड़ेगा. दूसरी ओर, कॉफी रोस्टिंग, ब्रूइंग और वेंडिंग मशीनों पर दी गई छूट वापस ले ली गई है. इससे कैफे, रेस्टोरेंट और ऑफिस स्पेस में इस्तेमाल होने वाली इन मशीनों की लागत बढ़ सकती है.
1 फरवरी 2026 से 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में 49 रुपये की बढ़ोतरी हुई है. दिल्ली में इसकी नई कीमत 1,740.50 रुपये हो गई है. इसका सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट और स्ट्रीट फूड कारोबार पर पड़ेगा. राहत की बात यह है कि घरेलू LPG और दूध की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है.