नई दिल्ली: बजट 2026 में कर प्रशासन को सरल और विवाद-मुक्त बनाने के लिए कई अहम बदलाव किए गए हैं. वित्त मंत्री ने कर निर्धारण और जुर्माना प्रक्रियाओं को एक ही आदेश में मिलाने का ऐलान किया, जिससे अलग-अलग नोटिस आने और लंबे विवादों की समस्या खत्म होगी. करदाताओं को राहत देते हुए अपील के दौरान जुर्माने पर ब्याज माफ किया गया है. अपील के लिए पहले जमा राशि कम की गई है और पुनर्मूल्यांकन शुरू होने के बाद भी रिटर्न अपडेट करने का मौका मिलेगा. ये कदम करदाताओं के लिए अनुकूल माहौल बनाने की दिशा में हैं.
अब कर निर्धारण और जुर्माना अलग-अलग नहीं होंगे. दोनों को एक ही आदेश में शामिल किया जाएगा. इससे नोटिसों की बाढ़ और लंबी कानूनी लड़ाई कम होगी. सबसे बड़ी राहत यह है कि अपील पहली अपीलीय प्राधिकरण में लंबित रहने तक जुर्माने पर कोई ब्याज नहीं लगेगा, चाहे अपील का फैसला किसी भी तरफ आए. यह बदलाव करदाताओं के लिए बड़ा बोझ हटाएगा.
अपील दाखिल करने के लिए पहले 20% राशि जमा करनी पड़ती थी, अब यह घटकर 10% रह गई है. यह राशि सिर्फ मूल कर मांग पर लगेगी, जुर्माना या ब्याज पर नहीं. इससे अपील करना आसान और सस्ता हो जाएगा. विशेषज्ञों का कहना है कि इससे छोटे करदाता भी बिना ज्यादा आर्थिक दबाव के अपना पक्ष रख सकेंगे.
पुनर्मूल्यांकन शुरू हो जाने के बाद भी करदाता अपना रिटर्न अपडेट कर सकेंगे. इसके लिए उस वित्त वर्ष की दर से 10% अतिरिक्त कर चुकाना होगा. अपडेटेड रिटर्न दाखिल होने पर अधिकारी उसी के आधार पर पुनर्मूल्यांकन करेंगे. यह सुविधा करदाताओं को गलतियां सुधारने का अंतिम मौका देगी और अनावश्यक मुकदमेबाजी से बचाएगी.
कुछ छोटे अपराधों जैसे किताबें-दस्तावेज न दिखाना या टीडीएस में नकद भुगतान के मामलों को अब अपराध की श्रेणी से हटाया गया है. इन्हें सिर्फ सिविल चूक माना जाएगा. ऐसे मामलों में केवल मौद्रिक जुर्माना लगेगा, जेल या आपराधिक कार्रवाई नहीं होगी. ये बदलाव कर प्रशासन को कम विरोधी और ज्यादा सहयोगी बनाने की कोशिश हैं.