रिटायरमेंट की योजना बना रहे लोगों के लिए 4% नियम लंबे समय से मार्गदर्शक रहा है, जो यह वादा करता है कि अगर आपकी संपत्ति सालाना 4% आय दे, तो आप बिना चिंता के रिटायर हो सकते हैं. लेकिन वेल्थ एडवाइजरी फर्म के संस्थापक अनमोल गुप्ता ने भारतीयों को चेतावनी दी है कि इस नियम को आंख मूंदकर न अपनाएं.
4% नियम की सीमाएं
गुप्ता ने अपने वायरल लिंक्डइन पोस्ट में लिखा, "यह नियम 30 साल के रिटायरमेंट की अवधि मानता है. यह तब काम करता है, जब आप 55 या 60 की उम्र में रिटायर हों. लेकिन अगर आप 40 की उम्र में जल्दी रिटायर होने की योजना बना रहे हैं, तो आपको कहीं बड़ा कोष चाहिए." उन्होंने कहा कि ज्यादातर लोग आज की खर्चों के आधार पर गणना करने की गलती करते हैं.
भारतीय संदर्भ में चुनौतियां
उदाहरण के तौर पर, यदि आप 30 साल के हैं और हर महीने 50,000 रुपये (सालाना 6 लाख) खर्च करते हैं, और 55 की उम्र में रिटायर होना चाहते हैं, तो 6% मुद्रास्फीति के साथ आपके खर्च 55 की उम्र में बढ़कर 24 लाख रुपये सालाना हो जाएंगे. 4% नियम के अनुसार, इसके लिए 6 करोड़ रुपये की जरूरत होगी, न कि 1.5 करोड़. गुप्ता बताते हैं कि यह नियम अमेरिकी डेटा पर आधारित है, जहां मुद्रास्फीति स्थिर, रिटर्न अनुमानित और सामाजिक सुरक्षा मजबूत है. भारत में उच्च मुद्रास्फीति, कम निश्चित आय रिटर्न और अनिश्चित स्वास्थ्य लागत इसे अव्यवहारिक बनाते हैं.
सही योजना की जरूरत
भारतीय वित्तीय योजनाकार 3-3.5% निकासी दर को अधिक सुरक्षित मानते हैं. गुप्ता ने सलाह दी, "एआई के युग में, अपने कोष का अनुमान लगाने के लिए उचित कैलकुलेटर का उपयोग करें. आपका भविष्य सटीकता का हकदार है, सामान्यीकरण का नहीं." सोशल मीडिया पर इस नियम का प्रचार अक्सर बिना संदर्भ के होता है.