नई दिल्ली: रोजाना सुबह उठते ही सबसे पहले लोगों की नजर पेट्रोल-डीजल के दाम पर जाती है, क्योंकि इसका सीधा असर घर के बजट पर पड़ता है. शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को देश के ज्यादातर बड़े शहरों में ईंधन की कीमतें लगभग स्थिर बनी रहीं, हालांकि शहर के हिसाब से दामों में अंतर जरूर देखने को मिला. राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर के भाव पर बिक रहा है. वहीं आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल का दाम 111.21 रुपये और डीजल का दाम 97.83 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया है. नीचे जानिए अपने शहर का पूरा रेट.
देश के प्रमुख शहरों में हैदराबाद और तिरुवनंतपुरम में पेट्रोल सबसे महंगा बिक रहा है, जहां कीमत क्रमशः 115.69 रुपये और 115.49 रुपये प्रति लीटर है. इसके अलावा कोलकाता में 113.47 रुपये, पटना में 113.35 रुपये और जयपुर में 112.66 रुपये प्रति लीटर पेट्रोल मिल रहा है. सबसे सस्ता पेट्रोल चंडीगढ़ में 98.10 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया है.
डीजल की बात करें तो तिरुवनंतपुरम में सबसे महंगा डीजल 104.40 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है, इसके बाद हैदराबाद में 103.82 रुपये और भुवनेश्वर में 100.92 रुपये प्रति लीटर का रेट है. वहीं चंडीगढ़ में डीजल सबसे सस्ता 86.09 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है, जो बाकी शहरों की तुलना में काफी कम है.
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) के मुताबिक, देश में डायनामिक फ्यूल प्राइसिंग सिस्टम के तहत हर दिन सुबह 6 बजे पेट्रोल-डीजल के दाम अपडेट किए जाते हैं. यह व्यवस्था जून 2017 से लागू है. ग्राहक चाहें तो इंडियन ऑयल की SMS सर्विस के जरिए भी अपने शहर का ताजा रेट जान सकते हैं.
पेट्रोल और डीजल की कीमतें राज्य-दर-राज्य बदलती रहती हैं, जिसकी मुख्य वजह वैट यानी राज्य स्तर का टैक्स, ट्रांसपोर्टेशन खर्च और डीलर कमीशन है. गौर करने वाली बात यह है कि पेट्रोल-डीजल अभी भी जीएसटी के दायरे से बाहर हैं, इसलिए राज्य सरकारों का टैक्स ही अंतिम कीमत तय करने में बड़ी भूमिका निभाता है.
घरेलू बाजार में कीमतों पर वैश्विक क्रूड ऑयल के दाम और रुपये-डॉलर एक्सचेंज रेट का भी सीधा असर पड़ता है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव सीधे पेट्रोलियम उत्पादों की लागत को प्रभावित करता है.
जानकारों की मानें तो उपभोक्ताओं को अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑयल कीमतों, डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल और राज्य स्तर के टैक्स में बदलाव पर नजर रखनी चाहिए. सितंबर में भू-राजनीतिक अनिश्चितता के चलते वैश्विक तेल कीमतें ऊंची बनी हुई हैं, हालांकि हाल के दिनों में इनमें उतार-चढ़ाव भी देखा गया है.