नई दिल्ली: क्लाउडफ्लेयर के वैश्विक आउटेज ने इंटरनेट दुनिया को कुछ घंटों के लिए हिला दिया और इसी के साथ कंपनी के संस्थापक और सीईओ मैथ्यू प्रिंस भी सुर्खियों में आ गए. उनकी नेटवर्थ, कंपनी की भूमिका और उनके दबंग बयानों पर एक बार फिर से नजर टिक गई है.
प्रिंस न सिर्फ आधुनिक इंटरनेट सुरक्षा के सबसे बड़े चेहरों में शामिल हैं, बल्कि तकनीकी दुनिया में अपनी स्पष्टवादिता और बेबाक विचारों के लिए भी जाने जाते हैं. आइए जानते हैं उनकी सफलता, संपत्ति और विवादों का पूरा सफर.
फोर्ब्स के अनुसार, मैथ्यू प्रिंस की नेटवर्थ लगभग 6.3 बिलियन डॉलर है. वे दुनिया के 598वें सबसे अमीर व्यक्ति के रूप में सूचीबद्ध हैं. उनकी संपत्ति का सबसे बड़ा हिस्सा क्लाउडफ्लेयर में उनकी लगभग 8% हिस्सेदारी से आता है. साल 2019 में कंपनी के सफल आईपीओ के बाद उनकी संपत्ति में तेजी से बढ़ोतरी हुई, जिसने उन्हें टेक इंडस्ट्री के प्रमुख अरबपतियों में शामिल कर दिया.
मैथ्यू प्रिंस ने 2009 में क्लाउडफ्लेयर की शुरुआत की थी, और आज यह दुनिया भर में इंटरनेट सुरक्षा और परफॉर्मेंस का बड़ा स्तंभ बन चुकी है. कंपनी लाखों वेबसाइटों को सुरक्षा, गति और इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट देती है. हालिया आउटेज से यह साफ हुआ कि इंटरनेट एक्सेस का कितना बड़ा हिस्सा क्लाउडफ्लेयर पर निर्भर करता है. आउटेज के चलते कंपनी के शेयरों में भी लगभग 4.5% गिरावट दर्ज की गई.
क्लाउडफ्लेयर बनाने से पहले प्रिंस टेक्नोलॉजी और कानून- दोनों क्षेत्रों में सक्रिय थे. वे एक लॉ प्रोफेसर रहे और Unspam Technologies नाम की कंपनी की सह-स्थापना की, जो स्पैम रोकने पर काम करती थी. इन्हीं अनुभवों ने उन्हें इंटरनेट सुरक्षा और डिजिटल खतरों को बेहतर समझने में मदद की. यही ज्ञान आगे चलकर क्लाउडफ्लेयर की नींव बना और उन्हें साइबर सुरक्षा क्षेत्र का प्रमुख चेहरा बना दिया.
हाल के महीनों में प्रिंस गूगल और उसके Gemini AI को लेकर काफी मुखर रहे हैं. WIRED को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने दावा किया कि गूगल अपने सर्च प्रभुत्व का इस्तेमाल AI के भविष्य को नियंत्रित करने के लिए कर रहा है. उन्होंने मजाक में कहा 'हम चाहें तो उन्हें ब्लॉक भी कर सकते हैं.' प्रिंस के मुताबिक गूगल दुनिया के लगभग 90% सर्च ट्रैफिक पर कब्जा रखता है, जो वेबसाइट मालिकों पर दबाव बनाता है कि वे अपना कंटेंट AI सिस्टम्स को दें.
हालिया क्लाउडफ्लेयर आउटेज ने दुनिया भर में इंटरनेट सेवाओं को प्रभावित किया. HSBC और Shopify जैसी प्रमुख सेवाएं ठप हो गईं. कंपनी ने बाद में तकनीकी समस्या का समाधान करने की बात कही, लेकिन इस घटना के बाद प्रिंस और उनकी कंपनी की भूमिका पर एक बार फिर से जोरदार चर्चा शुरू हो गई. यह साफ है कि इंटरनेट की वैश्विक संरचना में क्लाउडफ्लेयर की अहमियत लगातार बढ़ती जा रही है.