नई दिल्ली: देश में JEE और NEET जैसी परीक्षाएं लाखों छात्रों के सपनों का द्वार हैं, लेकिन इनकी तैयारी के लिए महंगी कोचिंग और शहरों की दौड़ भाग जरूरी हो जाती है. बिहार सरकार ने इस समस्या को जड़ से खत्म करने का ठान लिया है. अब राज्य के हर प्रखंड में मॉडल स्कूल खुलेंगे, जहां स्कूली शिक्षा के साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी फ्री मिलेगी. यह कदम ग्रामीण और गरीब परिवारों के बच्चों के लिए वरदान साबित होगा. शिक्षा विभाग की यह योजना सात निश्चय 3 के अंतर्गत आ रही है, जो शिक्षा में समानता लाने का मजबूत प्रयास है.
इन मॉडल स्कूलों में अनुभवी शिक्षक और विशेषज्ञ पढ़ाएंगे. छात्रों को नियमित टेस्ट सीरीज, आधुनिक लाइब्रेरी, डाउट क्लियरिंग सेशन और करियर काउंसलिंग जैसी सुविधाएं मिलेंगी. कक्षा 9 से ही JEE, NEET, ओलंपियाड जैसी परीक्षाओं पर फोकस होगा, ताकि बच्चे समय रहते मजबूत आधार बना सकें.
राज्य के कुल 534 प्रखंडों में एक एक मॉडल स्कूल बनाए जाएंगे. ये स्कूल इसी शैक्षणिक सत्र 2026 27 से शुरू होंगे. शिक्षा विभाग ने सभी तैयारियां तेज कर दी हैं. गांव गांव तक यह सुविधा पहुंचने से छात्रों को शहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा जरूरी होगी, जो 11 मार्च 2026 को आयोजित की जाएगी. राज्य शिक्षा शोध व प्रशिक्षण परिषद इस परीक्षा का संचालन करेगी. परीक्षा में अच्छे नंबर लाने वाले छात्रों को मेरिट लिस्ट के आधार पर एडमिशन मिलेगा. आरक्षण नीति भी लागू रहेगी, जिससे सभी वर्गों को मौका मिलेगा.
यह फैसला बिहार के लाखों छात्रों के लिए गेम चेंजर साबित होगा. अब कोचिंग सेंटर्स की महंगी फीस और शहरों की भागदौड़ से मुक्ति मिलेगी. ग्रामीण इलाकों के बच्चे भी डॉक्टर इंजीनियर बनने के सपने पूरे कर पाएंगे. सरकार का मकसद शिक्षा में असमानता खत्म करना है, और यह कदम उसी दिशा में मजबूत प्रयास है.