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अब मंदिरों के चढ़ावे से होगी लोगों की कमाई, जानें क्या है मध्य प्रदेश सरकार का 'टेंपल बॉन्ड इश्यू'?

मध्य प्रदेश सरकार उज्जैन के 11 मंदिरों के विकास के लिए भारत का पहला 'टेंपल बॉन्ड' जारी कर 200 करोड़ रुपये जुटाएगी. इस बॉन्ड का भुगतान सरकारी खजाने के बजाय मंदिरों के चढ़ावे से किया जाएगा.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
अब मंदिरों के चढ़ावे से होगी लोगों की कमाई, जानें क्या है मध्य प्रदेश सरकार का 'टेंपल बॉन्ड इश्यू'?
Courtesy: social media

उज्जैन: अब तक आपने कंपनियों और बुनियादी ढांचों के लिए तो बॉन्ड जारी होते खूब देखे होंगे लेकिन क्या कभी भगवान के नाम पर बॉन्ड के बारे में सुना है. मध्य प्रदेश की सरकार ने अब आस्था को निवेश से जोड़ते हुए एक ऐसा अनोखा कदम उठाया है जो पूरे देश के वित्तीय बाजार में हलचल मचा रहा है. 

दरअसल मध्य प्रदेश सरकार उज्जैन और उसके आसपास के 11 महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों के विकास और आधुनिकीकरण के लिए पैसे जुटाने का एक बेहद अनूठा प्रोजेक्ट तैयार कर रही है जिसे 'टेंपल बॉन्ड' नाम दिया गया है. अधिकारियों का मानना है कि भारतीय वित्तीय बाजार में इस तरह की यह पहली पहल होगी.

200 करोड़ रुपये जुटाने का रखा टारगेट

इस अनूठे प्रोजेक्ट के तहत उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा बॉन्ड जारी करके करीब 200 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है. तकनीकी रूप से यह एक 'म्यूनिसिपल बॉन्ड' होगा लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इस पर निवेशकों को मिलने वाला पैसा सरकारी खजाने के बजाय इन मंदिरों में आने वाले चढ़ावे और दान से वापस किया जाएगा.

11 मंदिरों की समितियों से होगा करार

अधिकारियों ने बताया कि उज्जैन विकास प्राधिकरण इन 11 मंदिरों की प्रबंधन समितियों के साथ करार करेगा. खास बात यह है कि ये मंदिर कोई प्राइवेट ट्रस्ट नहीं हैं बल्कि सरकारी समितियों और स्थानीय प्रशासन की देखरेख में चलते हैं. भक्त जो भी दान करेंगे उसी पैसे से बॉन्ड की अवधि पूरी होने पर निवेशकों को भुगतान किया जाएगा.

यह टेंपल बॉन्ड करीब 1100 करोड़ रुपये के एक बड़े धार्मिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का हिस्सा हैं. बाकी की रकम केंद्र सरकार के अर्बन चैलेंज फंड और बैंक लोन के जरिए जुटाई जाएगी. प्रशासन अभी इस बॉन्ड को बाजार में उतारने के लिए जरूरी सरकारी मंजूरियों और क्रेडिट रेटिंग हासिल करने में जुटा है.

बेहतर सुविधाओं से बढ़ेगी भक्तों की संख्या

सरकार का मानना है कि मंदिरों में बेहतर सुविधाएं, अच्छी सड़कें और वीआईपी इंतजाम होने से श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ेगी. जितने ज्यादा लोग दर्शन के लिए आएंगे उतना ही ज्यादा दान इकट्ठा होगा जिससे कर्ज चुकाना और आसान हो जाएगा. उदाहरण के लिए काल भैरव जैसे लोकप्रिय मंदिरों में रोज हजारों लोग आते हैं जिससे इस मॉडल के कामयाब होने की पूरी उम्मीद है.

अगर यह प्रयोग सफल रहा तो यह देश के अन्य धार्मिक शहरों के लिए भी एक मॉडल बनेगा. हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि निवेशकों की दिलचस्पी इस बात पर निर्भर करेगी कि मंदिरों के पैसों का हिसाब-किताब कितना पारदर्शी रहता है. कुल मिलाकर यह कदम न सिर्फ धार्मिक स्थलों को चमकाएगा बल्कि पर्यटन, रोजगार और स्थानीय बिजनेस को भी एक नया बूस्ट देगा.