menu-icon
India Daily

Dry Fruit Prices Hike: ड्राई फ्रूट्स के दामों में लगेगी आग, अटारी-वाघा सीमा बॉर्डर बंद होने से क्या है कनेक्शन?

दिल्ली के एक कारोबारी ने बताया कि अटारी-वाघा सीमा बंद होने के बाद सूखे मेवों की कीमतों में 20 फीसदी तक की बढ़ोतरी होने की संभावना है. दरअसल, भारत खासतौर से अफगानिस्तान से सूखे अंजीर, हींग, केसर, सूखे खुबानी, पिस्ता और किशमिश का आयात जमीन के रास्ते से करता है.

mayank
Edited By: Mayank Tiwari
Dry Fruit Prices Hike: ड्राई फ्रूट्स के दामों में लगेगी आग, अटारी-वाघा सीमा बॉर्डर बंद होने से क्या है कनेक्शन?
Courtesy: Social Media

भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव और अटारी-वाघा सीमा बंद करने के दिल्ली के फैसले से सूखे मेवों की कीमतों में उछाल की संभावना है. पीटीआई के अनुसार, निर्यातकों ने बताया कि अफगानिस्तान से बादाम, किशमिश, सूखे खुबानी और पिस्ता जैसे सूखे मेवों के आयात पर असर पड़ेगा, जिससे कीमतें बढ़ सकती हैं.

अफगानिस्तान और पाकिस्तान से आयात प्रभावित

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान भारत के लिए सूखे मेवों का प्रमुख निर्यातक है, लेकिन नई दिल्ली पाकिस्तान से भी इनका आयात करता है. अटारी-वाघा सीमा बंद होने से काबुल के साथ निर्यात और आयात दोनों प्रभावित होंगे. पंजाब के अमृतसर के पास स्थित यह सीमा भारत और अफगानिस्तान के बीच व्यापार का प्रमुख मार्ग है. भारत इस मार्ग से सूखे अंजीर, हींग, केसर, सूखे खुबानी, पिस्ता और किशमिश आयात करता है.

2024-25 में कारोबार आंकड़े

दरअसल, फाइनेंशियल ईयर 2024-25 (अप्रैल-जनवरी) में भारत का अफगानिस्तान को निर्यात 264.15 मिलियन डॉलर रहा, जबकि आयात 591.49 मिलियन डॉलर था। इसमें सूखे मेवों का आयात 358 मिलियन डॉलर रहा. इसी अवधि में पाकिस्तान से फल और मेवों का आयात मात्र 0.08 मिलियन डॉलर था.

20% तक बढ़ेंगी ड्राई फ्रूट्स की कीमतें

दिल्ली के एक आयातक ने पीटीआई को बताया कि सीमा बंद होने से पाकिस्तान और अफगानिस्तान दोनों से सूखे मेवों का आयात प्रभावित होगा. खारी बावली व्यापारी संघ के अध्यक्ष राजीव बत्रा ने कहा, “हालांकि अभी कोई तत्काल प्रभाव नहीं है क्योंकि माल रास्ते में है, लेकिन दस दिन बाद आयात पूरी तरह रुक जाएगा. इसके बाद से राजधानी दिल्ली में ड्राई फ्रूट्स की कीमतें 20 प्रतिशत तक बढ़ जाएंगी.”

उन्होंने आगे कहा, “हमें मेवे मिलेंगे, लेकिन वे संयुक्त अरब अमीरात, ईरान और इराक जैसे देशों से आएंगे, जो अफगानी सूखे मेवों के लिए वैकल्पिक मार्ग होंगे.