नई दिल्ली: ईटरनल लिमिटेड, जिसे पहले जोमैटो के नाम से जाना जाता था, एक बड़े नेतृत्व बदलाव की ओर बढ़ रहा है. कंपनी के संस्थापक और सीईओ दीपिंदर गोयल ने ऐलान किया है कि वे 1 फरवरी 2026 को अपने पद से हट जाएंगे. उनकी जगह ब्लिंकिट के संस्थापक और सीईओ अलबिंदर ढिंडसा समूह की कमान संभालेंगे. यह बदलाव ऐसे समय में हो रहा है जब ईटरनल फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स के क्षेत्र में तेजी से विस्तार कर रहा है.
दीपिंदर गोयल ने कंपनी के शेयरधारकों को लिखे पत्र में अपने फैसले की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि ईटरनल को अगले चरण में ले जाने के लिए नए नेतृत्व की जरूरत है. गोयल ने जोमैटो को एक छोटे स्टार्टअप से बहु-व्यवसाय समूह में बदला. सीईओ पद छोड़ने के बाद भी वे कंपनी के बोर्ड में बने रहेंगे और लंबी अवधि की रणनीति व दिशा तय करने पर काम करेंगे.
गोयल ने अलबिंदर ढिंडसा को अपना उत्तराधिकारी बताते हुए उनके नेतृत्व की सराहना की. ढिंडसा अब ईटरनल के फूड डिलीवरी, क्विक कॉमर्स और अन्य उभरते कारोबारों की रोजमर्रा की जिम्मेदारी संभालेंगे. ब्लिंकिट को भारत के सबसे तेजी से बढ़ते क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म में बदलने का अनुभव उनके पक्ष में जाता है. उद्योग जगत इस बदलाव को भविष्य के लिए अहम मान रहा है.
अलबिंदर ढिंडसा की शैक्षणिक यात्रा मजबूत रही है. उन्होंने 2000 से 2004 के बीच IIT दिल्ली से बीटेक किया. यहां उन्होंने तकनीकी समझ और विश्लेषण क्षमता विकसित की. इसके बाद उन्होंने 2010 से 2012 तक न्यूयॉर्क के कोलंबिया बिजनेस स्कूल से एमबीए किया. इस दौरान उन्हें रणनीति, वित्त और वैश्विक नेतृत्व की गहरी समझ मिली.
स्टार्टअप जगत में आने से पहले ढिंडसा ने कंसल्टिंग और फाइनेंस में काम किया. वे 2005 से 2007 तक यूआरएस कॉरपोरेशन में ट्रांसपोर्टेशन एनालिस्ट रहे. इसके बाद 2010 तक कैम्ब्रिज सिस्टमैटिक्स में सीनियर एसोसिएट के रूप में काम किया. 2011 में उन्होंने न्यूयॉर्क में यूबीएस इनवेस्टमेंट बैंक में भी अनुभव हासिल किया.
2014 में ढिंडसा ने ब्लिंकिट की स्थापना की, जिसका मकसद तेज डिलीवरी को संभव बनाना था. करीब 12 वर्षों में ब्लिंकिट क्विक कॉमर्स का बड़ा नाम बना. अब ईटरनल के सीईओ के रूप में ढिंडसा पर कई कारोबारों को एक साथ आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी. गोयल के अनुभव और ढिंडसा की ऊर्जा के साथ कंपनी नए दौर में कदम रख रही है.