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बजट 2026 पर टिकी जनता की नजरें, बचेगा पुराना टैक्स सिस्टम या नए सिस्टम में होगा बदलाव?

सभी टैक्स भरने वालों की नजर अब बजट की ओर है. हालांकि बजट 2026 से डायरेक्ट करदाताओं को ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद नहीं है लेकिन इनडायरेक्ट तरीके से लोगों को राहत मिल सकती है. इस बार के बजट को लेकर आइए जानते हैं क्या है एक्सपर्ट की राय.

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Edited By: Shanu Sharma
बजट 2026 पर टिकी जनता की नजरें, बचेगा पुराना टैक्स सिस्टम या नए सिस्टम में होगा बदलाव?
Courtesy: ANI

नई दिल्ली: बजट 2026 की ओर अब सबकी नजरें टिकी है. हालांकि इस बार टैक्सपेयर्स को यूनियन बजट से उतनी उम्मीद नहीं हैं क्योंकि पिछले बजट में काफी राहत मिली थी. उनका मानना है कि इस बार डायरेक्ट टैक्स में उन्हें ज्यादा फायदा नहीं मिलने वाला है.

विशेषज्ञों का भी कहना है कि सरकार अब डायरेक्ट टैक्स में राहत देने की स्थिति में नहीं है. इसके बजाए मौजूदा प्रणालियों को सरल बनाने, पुराने बदलावों को मजबूत करने और कर प्रशासन को अधिक कुशल बनाने पर केंद्रित हो सकता है .

बजट पर क्या है विशेषज्ञों की राय?

बजट 2025 में नई कर व्यवस्था को डिफॉल्ट विकल्प के रूप में प्रोत्साहित किया गया है. जबकि पुरानी व्यवस्था उन लोगों के लिए बरकरार रखी गई है जो मौजूदा कटौतियों पर निर्भर हैं . जैसे-जैसे बजट की तारीख नजदीक आ रही है, सवाल उठ रहा है कि क्या पुरानी प्रणाली जारी रहेगी या नई में कटौतियां शामिल की जाएंगी . विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार की नई कर व्यवस्था को प्राथमिकता देने की नीति के बावजूद, पुरानी प्रणाली को पूरी तरह खत्म करना फिलहाल व्यावहारिक नहीं लगता. क्योंकि आंकड़े बताते हैं कि करदाताओं का एक बड़ा ग्रुप अभी भी पुरानी व्यवस्था को ज्यादा मानता है. 

पुरानी प्रणाली को अब मान रहे लोग 

पुराने साल कर दाताओं के आंकड़ों को देखा जाए तो यह स्पष्ट है कि करदाताओं का एक बड़ा वर्ग अभी भी पुरानी व्यवस्था को तरजीह देता है . आकंड़े के मुताबिक 7.28 करोड़ आईटीआर में से करीब 2.01 करोड़ (28 प्रतिशत) पुरानी प्रणाली के तहत थे. एक्सपर्ट का मानना है कि पुराणी व्यवस्था उन लोगों को ज्यादा आकर्षित करती है जो एचआरए, होम लोन ब्याज, धारा 80सी, 80डी, 80ई और 80जी जैसी महत्वपूर्ण कटौतियां दावा कर सकते हैं.

अभी भी 28 प्रतिशत करदाताओं की पसंद पुरानी व्यवस्था है. ऐसे में इसे पूरी तरह से खत्म नहीं किया जा सकात है. इस बार बजट से उम्मीद की जा रही है कि सरकार आवास खरीद को प्रोत्साहित करेगी. उम्मीद की जा रही है कि वित्तीय दबावों के बीच बड़े पैमाने की राहत के बजाय चुनिंदा प्रोत्साहन पर जोर दिया जा सकता है. हालांकि छोटे-मोटे संशोधन की भी संभावना जताई जा रही है, लेकिन बड़े पैमाने के परिवर्तन की उम्मीद नहीं है.