नई दिल्ली: भारतीय सड़कों पर रोज़ लाखों कारें दौड़ती हैं और छोटी-मोटी टक्कर आम बात है. ऐसे में कई कार मालिक सुरक्षा बढ़ाने के लिए अतिरिक्त बंपर लगवाते हैं. कुछ इसे मजबूती का समाधान मानते हैं, तो कुछ सिर्फ स्टाइल अपग्रेड. लेकिन सवाल बड़ा है-क्या यह आपकी कार की असली सुरक्षा को बढ़ाता है या उसके मूल डिजाइन को बिगाड़ देता है?
ऑटो एक्सपर्ट्स मानते हैं कि हर कार का फ्रंट और रियर क्रैश-जोन खास इंजीनियरिंग के साथ डिजाइन किया जाता है. अतिरिक्त बंपर सही हो तो मददगार, लेकिन गलत हो तो नुकसानदायक साबित हो सकता है. इसलिए, बंपर लगवाने से पहले तकनीकी और कानूनी पहलुओं को समझना बेहद जरूरी है.
अतिरिक्त बंपर कम गति पर होने वाली हल्की टक्कर में गाड़ी की बॉडी को खरोंच और डेंट से बचा सकता है. परंतु अगर बंपर बहुत भारी, सख्त या गलत डिजाइन का हो, तो टक्कर के समय झटका सीधे चेसिस तक पहुंच सकता है. यह कार के मूल क्रैश-ज़ोन को निष्क्रिय कर देता है, जिससे सुरक्षा घटने का खतरा बढ़ जाता है.
कई मॉडर्न कारें फ्रंट सेंसर, ADAS, कैमरा और एयरबैग ट्रिगर सिस्टम पर निर्भर करती हैं. गलत बंपर फिटमेंट सेंसर रीडिंग को बाधित कर सकता है. एयरबैग समय पर न खुले या गलत सिग्नल मिले, तो दुर्घटना के समय यह गंभीर समस्या बन सकती है. सेंसर-फ्रेंडली बंपर चुनना अनिवार्य है.
अतिरिक्त बंपर से कार का कुल वजन बढ़ता है, जिसका सीधा असर माइलेज और सस्पेंशन पर पड़ता है. फ्रंट वजन बढ़ने से स्टीयरिंग बैलेंस बदल सकता है. तेज़ गति पर कार का एयरोडायनामिक फ्लो भी प्रभावित होता है. हल्के, कंपनी-ग्रेड और एयरोडायनामिक डिजाइन वाले बंपर बेहतर माने जाते हैं.
भारत में वाहन में मॉडिफिकेशन RTO नियमों के अधीन आता है. अगर बंपर कार की लंबाई, डिजाइन या वजन मानकों को बदलता है, तो चालान का जोखिम रहता है. कई इंश्योरेंस कंपनियां अनअप्रूव्ड बंपर को क्लेम रिजेक्ट का कारण भी मान सकती हैं. बिल और अप्रूवल सुरक्षित रखें.
अगर आपकी कार में सेंसर या ADAS सिस्टम है, तो केवल वही बंपर लगवाएं जो सेंसर कट-आउट और कंपनी मानकों के अनुसार बने हों. ग्रामीण या संकरी सड़कों पर हल्का गार्ड बंपर उपयोगी हो सकता है. लेकिन हाई-स्पीड ड्राइविंग और अनसर्टिफाइड स्टील बंपर से बचना बेहतर है.