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बैटरी खत्म होने के बाद भी नहीं रुकेगी कार! REEV की ये टेक्नोलॉजी बदल सकती है EV का पूरा खेल

इलेक्ट्रिक कार खरीदने वालों के सामने सबसे बड़ी चिंताओं में से एक लंबी यात्रा के दौरान चार्जिंग स्टेशन की उपलब्धता है. इसी परेशानी को कम करने के लिए Range Extender Electric Vehicle यानी REEV तकनीक चर्चा में है.

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Edited By: Reepu Kumari
बैटरी खत्म होने के बाद भी नहीं रुकेगी कार! REEV की ये टेक्नोलॉजी बदल सकती है EV का पूरा खेल
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: भारत में इलेक्ट्रिक कारों की मांग लगातार बढ़ रही है. शहरों में चार्जिंग स्टेशन भी बढ़ रहे हैं, लेकिन हर जगह नेटवर्क अभी उतना मजबूत नहीं है. खासकर हाईवे और छोटे शहरों में लंबी दूरी तय करने वाले लोगों को बैटरी खत्म होने की चिंता रहती है. इसी समस्या के बीच REEV तकनीक एक ऐसे विकल्प के रूप में सामने आ रही है, जो इलेक्ट्रिक ड्राइविंग के साथ जरूरत पड़ने पर पेट्रोल से बिजली बनाने की सुविधा देती है.

REEV के बारे में

REEV को समझने का आसान तरीका यह है कि इसे इलेक्ट्रिक कार और बैकअप पावर सिस्टम के मेल के तौर पर देखा जा सकता है. इसमें कार के पहियों को सीधे पेट्रोल इंजन नहीं चलाता. पहियों को केवल इलेक्ट्रिक मोटर चलाती है और बैटरी उसे बिजली देती है. जब बैटरी का चार्ज कम होता है, तब पेट्रोल इंजन जनरेटर चलाकर बिजली बनाता है. इस बिजली से मोटर कार को चलाती रहती है.

बैटरी कम होते ही शुरू होगा दूसरा सिस्टम

सामान्य EV में बैटरी खत्म होने पर चार्जिंग जरूरी होती है. REEV में भी बैटरी को बाहर से चार्ज किया जा सकता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर पेट्रोल इंजन बैकअप की भूमिका निभाता है. यह इंजन पहियों से जुड़कर उन्हें नहीं घुमाता, बल्कि जनरेटर के जरिए बिजली तैयार करता है. यही व्यवस्था लंबी दूरी के सफर में उपयोगी हो सकती है, क्योंकि चार्जिंग स्टेशन न मिलने पर भी कार को आगे बढ़ाने का विकल्प मौजूद रहता है.

हाइब्रिड से अलग है इसकी कहानी

REEV को सामान्य हाइब्रिड कार समझना सही नहीं होगा. हाइब्रिड वाहन में पेट्रोल इंजन और इलेक्ट्रिक मोटर दोनों जरूरत के हिसाब से पहियों को चला सकते हैं. वहीं REEV में पहियों को केवल इलेक्ट्रिक मोटर चलाती है. इसका पेट्रोल इंजन सिर्फ बिजली बनाने के लिए इस्तेमाल होता है. यही बात इसे पारंपरिक हाइब्रिड से अलग बनाती है. यानी ड्राइविंग का काम इलेक्ट्रिक मोटर के पास रहता है, जबकि इंजन बैकअप पावर तैयार करता है.

PHEV से भी है बड़ा फर्क

प्लग इन हाइब्रिड यानी PHEV में बड़ी बैटरी होती है और इसे बाहर से चार्ज किया जा सकता है. लेकिन जरूरत पड़ने पर इसका पेट्रोल इंजन सीधे पहियों को भी चला सकता है. REEV में इंजन और पहियों के बीच ऐसा सीधा कनेक्शन नहीं होता. इसका इंजन बिजली बनाने तक सीमित रहता है. इस वजह से REEV की तकनीक इलेक्ट्रिक ड्राइविंग पर ज्यादा केंद्रित रहती है, जबकि पेट्रोल सिस्टम जरूरत के समय बैकअप उपलब्ध कराता है.

भारत में कितना बड़ा विकल्प बन सकती है?

भारत में शहरों के बाहर चार्जिंग सुविधा हर जगह समान नहीं है. इसी वजह से जो लोग रोजाना शहर में इलेक्ट्रिक कार चलाना चाहते हैं, लेकिन लंबी यात्रा को लेकर परेशान रहते हैं, उनके लिए REEV आकर्षक विकल्प बन सकती है. कंपनियों के दावों के अनुसार इसकी कुल रेंज 1,100 1,200 किलोमीटर तक हो सकती है, जबकि सामान्य BEV की रेंज करीब 500 600 किलोमीटर बताई जाती है.