नई दिल्ली: आजकल नई कार की डिलीवरी का पल बेहद खास होता है. लोग अपनी सालों की बचत जोड़कर यह खुशी का क्षण मनाते हैं और अक्सर रील्स या वीडियो बनवाकर सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं. लेकिन इस उत्साह में कई बार जरूरी जांच छूट जाती है. डीलरशिप पर कार लेने से पहले कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है, ताकि बाद में कोई पछतावा न हो.
डिलीवरी लेते समय सबसे पहले कार के पेंट, दरवाजों, छत, बंपर और डिग्गी को ध्यान से देखें. कहीं कोई स्क्रैच, डेंट या छोटा निशान तो नहीं है, यह अच्छी तरह चेक करें. सिर्फ कैमरा ऑन करके रील बनाने में न उलझें. कई बार ट्रांसपोर्टेशन के दौरान छोटी-मोटी क्षति हो जाती है, जिसे तुरंत पकड़ना चाहिए.
कार के इंफोटेनमेंट सिस्टम, ब्लूटूथ, स्पीकर, पावर विंडो, सनरूफ और एसी को चालू करके देख लें कि सब ठीक काम कर रहा है या नहीं. सीट कवर्स की फिटिंग, प्लास्टिक पार्ट्स पर दाग और लाइट्स (हेडलाइट, इंडिकेटर, टेललाइट) को भी जरूर टेस्ट करें. अगर कोई फीचर ठीक से काम नहीं कर रहा तो तुरंत डीलर को बताएं.
टायरों को ध्यान से देखें कि वे बिल्कुल नए हैं, उन पर कोई कट या घिसाव तो नहीं. मैन्युफैक्चरिंग डेट भी चेक करें. डिग्गी खोलकर स्पेयर व्हील, जैक और पूरी टूलकिट मौजूद है या नहीं, यह पक्का कर लें. सही टायर और टूल्स की उपलब्धता लंबी यात्राओं में सुरक्षा सुनिश्चित करती है.
बोनट खोलकर देखें कि कोई तार ढीला तो नहीं, इंजन से तेल या पानी रिस तो नहीं रहा. ब्रेक ऑयल, कूलेंट आदि का स्तर सही होना चाहिए. कार स्टार्ट करके इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर पर कोई वार्निंग लाइट जल रही है या नहीं, यह भी ध्यान दें. इंजन की आवाज साफ और सामान्य होनी चाहिए.
कार का मीटर रीडिंग आमतौर पर 50 किलोमीटर से कम होनी चाहिए. अगर ज्यादा है तो डीलर से कारण पूछें. बिल, इंश्योरेंस पेपर, रजिस्ट्रेशन और वारंटी दस्तावेज ध्यान से पढ़ें. चेसिस नंबर सभी कागजात से मैच करना चाहिए. कोई कमी दिखे तो तुरंत सूचित करें और लिखित में नोट करवाएं.