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India Daily

कतर से कार तक कैसे पहुंचता है CNG, LNG प्रोडक्शन कितना जरूरी? कतर के प्लांट पर हमले से सप्लाई चेन प्रभावित

मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण ऊर्जा सप्लाई चेन ब्रेक हुआ है. ईरान ने कतर के लाफान इंडस्ट्रियल सिटी पर हमला कर दिया. जिसके बाद LNG सप्लाई प्रभावित हुई है. आने वाले समय में भारत समेत कई देशों को इसका भारी नुकसान पहुंचने वाला है.

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Edited By: Shanu Sharma
कतर से कार तक कैसे पहुंचता है CNG, LNG  प्रोडक्शन कितना जरूरी? कतर के प्लांट पर हमले से सप्लाई चेन प्रभावित
Courtesy: X (@bayraktar_1love)

मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण पूरी दुनिया का ऊर्जा सप्लाई चेन प्रभावित हुआ है. कतर के रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी पर हमलों से दुनिया का सबसे बड़ा LNG हब प्रभावित हुआ है. जिसके कारण ग्लोबल गैस सप्लाई पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है. कतर ने अभी के लिए एलएनजी का उत्पादन रोक दिया है, जिसका सीधा असर भारत जैसे देशों (जो दूसरे देशों पर निर्भर हों) पर पड़ सकता है.

इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुए इस जंग ने अब व्यापक रुप ले लिया है. ईरान ने कतर के गैस प्लांट पर हमले किए. जिसके बाद कंपनी ने फोर्स मेज्योर घोषित कर दिया. इससे वैश्विक एलएनजी का करीब 20% हिस्सा प्रभावित हो गया. गैस की कीमतें यूरोप और एशिया में तेजी से बढ़ रही. ऐसे में हमें इसके उत्पादन और ट्रांसपोर्टेशन प्रक्रिया के बारे में पता होना चाहिए.

कतर में एलएनजी प्लांट पर हमला

रास लाफान दुनिया की सबसे बड़ीएलएनजी एक्सपोर्ट टर्मिनल है. ईरान के  हमले में इसे भारी नुकसान पहुंचा है. कतर एनर्जी के सीईओ साद अल-काबी ने कहा कि हमले के बाद 17% एक्सपोर्ट क्षमता प्रभावित हुई. इसे दोबारा ठीक करने में मरम्मत के लिए 3 से 5 साल लग सकते हैं. जिसके कारण सालाना 20 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है. लिक्विफाइड नेचुरल गैस को तैयार करने के लिए काफी लंबा प्रोसेस अपनाया जाता है.

LNG को -162 डिग्री सेल्सियस पर ठंडा करके तरल रूप में बदलकर तैयार किया जाता है. इस प्रोसेस से उसका आयतन 600 गुना कम हो जाता है और ट्रांसपोर्ट और स्टोरेज आसान हो जाता है. इतिहास में 19वीं सदी से इस प्रयोग को शुरू किया गया था. इसमें माइकल फैराडे जैसे वैज्ञानिकों का योगदान रहा, पहला कमर्शियल प्लांट 1941 में अमेरिका में बना और 1964 में अल्जीरिया से यूके पहला शिपमेंट हुआ. वहीं सीएनजी काफी अलग होती है.

सीएनजी सप्लाई प्रभावित होने का खतरा 

सीएनजी हाई प्रेशर में कंप्रेस्ड गैस है. एलएनजी से री-गैसीफिकेशन के बाद गैस बनती है. फिर हाई प्रेशर पर कंप्रेस करके सीएनजी तैयार किया जाता है. यह प्रक्रिया तीन चरणों में होती है, जिसमें हीटिंग, कंप्रेशन और डिस्ट्रीब्यूशन शामिल है. वाहनों में सीएनजी इस्तेमाल होती है, इसे सस्ती और क्लीन फ्यूल माना जाता है. एलएनजी को स्पेशल जहाजों से ले जाया जाता है.

भारत दुनिया के बड़े एलएनजी आयातकों में है. अपने कुल जरूरत का लगभग 50 प्रतिशत आयात से पूरी होती है. जिसमें से कतर से लगभग 45% तक एलएनजी आती है. अब सप्लाई रुकने से कीमतें बढ़ सकती हैं. इंडस्ट्री, पावर और घरेलू उपयोग प्रभावित हो सकता है. एलएनजी अब सिर्फ ईंधन नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति का हथियार बन चुकी है.