नई दिल्ली: हर ड्राइवर जानता है कि हैंड ब्रेक या पार्किंग ब्रेक का इस्तेमाल गाड़ी को पार्क करने के लिए किया जाता है. यह गाड़ी को स्थिर रखता है और ढलान पर भी सरकने नहीं देता. लेकिन कई बार गलती से या जल्दबाजी में लोग चलती कार में ही हैंड ब्रेक खींच बैठते हैं. यह छोटी-सी भूल बड़े हादसे का कारण बन सकती है. विशेषज्ञों के अनुसार, हैंड ब्रेक सिर्फ पिछले पहियों पर काम करता है, इसलिए अचानक लगने से कार का संतुलन बिगड़ जाता है. आइए जानते हैं कि इससे क्या-क्या गंभीर नुकसान हो सकते हैं और क्यों इसे कभी नहीं करना चाहिए.
चलती गाड़ी में हैंड ब्रेक लगाने से पिछले पहिए अचानक लॉक हो जाते हैं, जबकि आगे के पहिए घूमते रहते हैं. इससे कार फिसलने लगती है, स्किड हो सकती है और स्पीड ज्यादा होने पर पलट भी सकती है. खासकर मोड़ पर या बारिश में यह खतरा कई गुना बढ़ जाता है. ड्राइवर का पूरा कंट्रोल छिन जाता है और एक्सीडेंट होने की संभावना बहुत ज्यादा हो जाती है. यह सबसे बड़ा और जानलेवा नुकसान है, जिससे बचना सबसे जरूरी है.
हैंड ब्रेक मजबूत केबल से जुड़ा होता है. चलती कार में इसे जोर से लगाने पर केबल पर अत्यधिक दबाव पड़ता है और वह टूट सकती है. केबल टूटने से इमरजेंसी ब्रेकिंग का आखिरी सहारा भी चला जाता है. कई बार इससे मुख्य ब्रेक सिस्टम भी प्रभावित होता है. ब्रेक फेल होने पर गाड़ी रोकना मुश्किल हो जाता है, जिससे बड़ा हादसा हो सकता है. मैकेनिक बताते हैं कि ऐसी स्थिति में तुरंत सर्विस जरूरी होती है.
पिछले पहिए लॉक होने से टायरों पर जबरदस्त घिसाव होता है, वे जल्दी खराब हो जाते हैं. ब्रेक शू और ड्रम इतने गर्म हो जाते हैं कि वे पिघल सकते हैं या वार्प हो सकते हैं. अचानक झटके से एक्सल और सस्पेंशन सिस्टम टूट-फूट सकता है. इससे गाड़ी की हैंडलिंग खराब हो जाती है और लंबे समय तक कंपन या आवाज आने लगती है. मरम्मत में हजारों रुपये खर्च हो सकते हैं.
चलती कार में हैंड ब्रेक लगाने से ट्रांसमिशन पर जबरदस्त दबाव पड़ता है. गियरबॉक्स के अंदरूनी पार्ट्स डैमेज हो सकते हैं, जिससे गियर लगना बंद हो जाता है या पूरी तरह खराब हो जाता है. कई मामलों में पूरा गियरबॉक्स बदलना पड़ता है, जिसमें 50 हजार से ज्यादा का खर्च आ सकता है. कार को सर्विस सेंटर तक टो करवाना पड़ता है. यह नुकसान सबसे महंगा और लंबे समय तक परेशान करने वाला होता है.