Aftermarket Parts In Car: जब आप कभी कार खरीदते हैं तो क्या आपको कभी उसमें कुछ नया करवाने का मन करता है जैसे कि लाइट्स अलग लगवाना या कुछ और कस्टमाइजेशन. अगर हां, तो जाहिर है कि आपने ऐसा कराया भी होगा. अगर इसका जवाब भी हां है तो ये खबर आपके लिए है. बता दें कि अगर आप अपनी कार में आफ्टरमार्केट पार्ट्स लगवाते हैं तो आपको भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है.
बता दें कि आफ्टरमार्केट पार्ट्स वो होते हैं जो कार मैन्यूफैक्चरर नहीं बनाता है लेकिन फिर भी कार में इस्तेमाल किए जाते हैं. इन्हें मार्केट से कम कीमत में खरीदा जा सकता है जिसके चलते लोग इन्हें खरीद लेते हैं. आसान भाषा में, जो पार्ट्स आप अपनी कार में बाहर से लगवाते हैं वो आफ्टरमार्केट पार्ट्स होते हैं. हालांकि, इसके काफी नुकसान हैं जो हम आपको यहां बता रहे हैं.
1. वारंटी रद्द करना: आफ्टरमार्केट पार्ट्स लगाने से मैन्यूफैक्चरर की पॉलिसी के तहत आपकी कार की वारंटी रद्द हो सकती है.
2. ड्यूरेबलिटी: आफ्टरमार्केट पार्ट्स OEM पार्ट्स की तरह अच्छी क्वालिटी के नहीं होते हैं जिससे ये कंपनी के स्टैंडर्ड को पूरा करने में असमर्थ रहते हैं.
3. कंपेटिबिलिटी: आफ्टरमार्केट पार्ट्स आपकी कार के मेक और मॉडल के साथ पूरी तरह से कंपेटिबल नहीं हो सकते हैं, जिससे इंस्टॉलेशन की समस्या आ सकती है.
4. सिक्योरिटी रिस्क: कुछ आफ्टरमार्केट पार्ट्स सिक्योरिटी से समझौता कर सकते हैं और ये सिक्योरिटी स्टैंडर्ड पर खरे नहीं उतरते हैं.
5. रीसेल वैल्यू में कमी: आफ्टरमार्केट पार्ट्स लगाने से आपकी कार का रीसेल वैल्यू कम हो सकती है.
6. इंस्टॉलेशन: आफ्टरमार्केट पार्ट्स लगाना मुश्किल और समय लेने वाला हो सकता है.
7. वारंटी और सपोर्ट लिमिटेशन: आफ्टरमार्केट पार्ट्स मैन्यूफैक्चरर से वारंटी या सपोर्ट के साथ नहीं आते हैं.
8. नुकसान की संभावना: आफ्टरमार्केट पार्ट्स लगाने से आपकी कार के इंजन, ट्रांसमिशन या अन्य कंपोनेंट्स को नुकसान हो सकता है.
9. एमिशन और रेगुलेटरी इश्यू: आफ्टरमार्केट पार्ट्स एमिशन स्टैंडर्ड या रेगुलेटरी जरूरतों को पूरा नहीं करते हैं.
10. लुक: आफ्टरमार्केट पार्ट्स आपकी कार के ओरिजनल लुक को पूरी तरह से खराब कर सकते हैं.