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Sawan 2024: सावन के सोमवार को पढ़ें ये खास व्रत कथा, भोलेनाथ करेंगे सभी इच्छी और पूरी!

Sawan Somwar 2024: आज यानी 12 अगस्त को सावन का चौथा सोमवार है. हिंदू धर्म में कई लोग व्रत रखते हैं. ऐसा कहा जाता है कि सोमवार का व्रत रखने से भोलेनाथ मनचाही इच्छा पूरी कर देते हैं. इस दिन भगवान शिव जी की विधिपूर्वक पूजा की जाती है. इसके साथ सोमवार की व्रत कथा का पाठ सुनना और पढ़ना बेहद शुभ माना जाता है. आइए पढ़ते हैं यह सोमवार की खास व्रत कथा.

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Sawan 2024: सावन के सोमवार को पढ़ें ये खास व्रत कथा, भोलेनाथ करेंगे सभी इच्छी और पूरी!
Courtesy: Pinterest

Somvar Vrat Katha: सावन महीने के चौथे सोमवार के दिन भगवान शिव जी की विधिपूर्वक पूजा की जाती है. जीवन में सुख-समृद्धि हासिल करने के लिए कई लोग सावन महीने में सोमवार का व्रत रखते हैं. ऐसा माना जाता है कि सोमवार का व्रत रखने से भोलेनाथ मनचाही इच्छा पूरी कर देते हैं. आज यानी 12 अगस्त को सावन सोमवार का चौथा व्रत रखा जा रहा है. इस दिन सावन सोमवार की व्रत कथा का पाठ सुनना और पढ़ना बहुत शुभ माना जाता है.

पौराणिक कथाओं के मुताबिक, एक साहूकार जिसे धन-दौलत किसी चीज की कमी नहीं लेकिन फिर भी वह उदास रहता था. ऐसा इसलिए क्योंकि उसकी कोई संतान नहीं थी. वह शिव भगवान का बहुत बड़ा भक्त. संतान प्राप्ति के लिए  वह रोज भगवान शिव के मंदिर में जाकर दिया जलाता था. साहूकार की भक्ति को देख पार्वती ने शिव जी से उसके सभी कष्टों को दूर करने के लिए कहा. तभी भोलेनाथ कहते हैं कि पार्वती इस साहूकार के भाग्य में संतान का योग नहीं है. 

भगवान शिव ने दिया वरदान

भोलेनाथ, मां पार्वती से कहते हैं कि इसे संतान का वरदान मिल भी गया तो वह  केवल 12 साल तक जिंदा रहेगा. माता पार्वती उनकी बात और उन्होंने साहूकार की पुत्र वरदान के लिए कहा. शिव जी ने मां पार्वती के बार-बार कहने पर साहूकार को पुत्र का वरदान दिया. इसके साथ उन्होंने कहा की वह केवल 12 साल जीवित रहेगा. साहूकार ये सारी बात सुन रहा था लेकिन फिर भी पहले की तरह भोलेनाथ करता था. उसके बाद नौवें महीने में साहूकार को पुत्र हुआ. परिवार के लोग सब खुश थे लेकिन साहूकार उदास था. उसके किसी को पुत्र जीवित रहने की बात नहीं बताई थी. 

साहूकार बेटे की हुई शादी

जब बच्चा 11 साल को हुआ तो साहूकार ने पुत्र को पढ़ने के लिए काशी जी भेजने का फैसला किया. उसने बच्चे के मामा को बुलाया और पढ़ने के लिए काशी लेकर जाने के लिए कहा. इसके साथ साहुकार ने कहा रास्ते में जहां भी रुकना वहां यज्ञ और ब्राह्मणों को भोजन कराते हुए आगे बढ़ना. वे दोनों इसी तरह गए थे. वहीं, रास्ते में एक राजकुमारी की शादी हो रही थी. राजकुमारी का पति एक आंख से काना था. जब राजकुमारी के पिता ने साहूकार के सुंदर बेटे को देखा तो उसे दुल्हा बनाकर शादी के सभी काम संपन्न कराने का फैसला लिया. राजा ने बच्चे के मामा को इसके लिए खूब धन भी दिया था. 

साहूकार के बेटे की हुई मौत

जब दोनों की शादी हो गई तब बच्चे ने राजकुमारी के चुनरी पर लिखा कि तेरी शादी मेरे साथ हुई है लेकिन जिस राजकुमार के साथ तुम्हें भेजेंगे वह एक आंख से काना हैं. इसके बाद वह मामा के काशी के लिए रवाना हो गया. जब राजकुमारी इसे पढ़ा तो उसने जाने के लिए मना कर दिया. फिर बारात वापस लौट गई और मामा और भांजे काशी भी पहुंच गए थे. एक बार जब मामा यज्ञ की तैयारी कर रहे थे वह वहां नहीं आया जब अंदर जाकर देखा तो साहूकार के बेटे की मौत हो गई थी. 

भगवान शिव ने किया जीवित

मामा ने रोना शुरू कर दिया था. तभी उसी रास्ते से भगवान शिव-पार्वती गुजर रहे थे. अवाज सुनने पर मां पार्वती ने शिव जी से पूछा कौन रो रहा है? बाद में पता चला की यह वही साहूकार का बेटा है. तभी मां पार्वती ने उसे जीवित करने के लिए कहा लेकिन शिव जी ने बताया कि इसकी आयु इतनी ही थी. माता पार्वती की बार-बार आग्रह करने पर भगवान शिव ने उसे जीवित कर दिया. मामा-भांजे ने भगवान को धन्यवाद करते हुए नगर वापस लौटे. 

भोलेनाथ हुए प्रसन्न

मामा-भांजा दोनों उसी रास्ते से आए जहां से राजकुमारी से उसकी शादी हुई थी. तब राजा ने राजकुमारी को उसके साथ खूब सारा धन देकर विदा किया. घर पर साहूकार और उसकी पत्नी सोच रखा था कि अगर उनका बेटा सकुशल न लौटा तो वह छत से कूदकर अपनी जान दे देंगे. उसके बाद मामा, भांजा और बहू दोनों आए और उनका स्वागत किया. उसी रात साहूकार के सपने में शिवजी आए और बताया कि वह उसकी पूजा से खुश हैं. इस लिए पुत्र को जीवित कर दिया. ऐसा कहा जाता है यह कथा सुनने या पढ़ने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. 

Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है.  theindiadaily.com  इन मान्यताओं और जानकारियों की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह ले लें.