नई दिल्ली: रक्षा बंधन भाई बहन के पवित्र रिश्ते का त्योहार है. इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र और सुख समृद्धि की कामना करती हैं. धार्मिक मान्यताओं में राखी बांधने के समय का विशेष महत्व बताया गया है.
यही वजह है कि रक्षा बंधन पर भद्रा काल में राखी बांधने से बचने की सलाह दी जाती है. हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा काल को शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता. रक्षा बंधन के दिन भी भद्रा काल में रक्षासूत्र बांधने से बचने की परंपरा है. इसके पीछे एक पौराणिक कथा भी प्रचलित है.
लोकप्रिय कथा के अनुसार लंकापति रावण की बहन शूर्पणखा ने भद्रा काल में अपने भाई को राखी बांधी थी. इसके बाद रावण का विनाश हो गया. इसी कथा के आधार पर मान्यता बनी कि भद्रा के समय भाई की कलाई पर राखी बांधना शुभ नहीं होता.
हालांकि यह कथा धार्मिक मान्यता और लोक परंपरा का हिस्सा है. इसे ऐतिहासिक घटना के रूप में प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाता.
पौराणिक मान्यताओं में भद्रा को सूर्य देव की पुत्री और न्याय के देवता शनि देव की बहन बताया गया है. कहा जाता है कि भद्रा का स्वभाव उग्र था और उनके प्रभाव के कारण शुभ कार्यों में बाधा आती थी. इसी वजह से पंचांग में भद्रा काल को देखकर कई मांगलिक कार्यों के समय का निर्धारण किया जाता है.
वैदिक पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को सुबह 9 बजकर 8 मिनट से शुरू होगी और 28 अगस्त को सुबह 9 बजकर 48 मिनट पर समाप्त होगी. उदया तिथि के अनुसार रक्षा बंधन का पर्व 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा.
इस साल रक्षा बंधन पर भद्रा को लेकर कोई लंबा व्यवधान नहीं बताया जा रहा है. दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार 28 अगस्त को सुबह 5 बजकर 57 मिनट से 9 बजकर 48 मिनट तक राखी बांधने का समय बताया गया है. हालांकि अलग अलग स्थानों पर सूर्योदय और पंचांग गणना में अंतर के कारण मुहूर्त में बदलाव हो सकता है. इसलिए स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि करना बेहतर रहेगा.
रक्षा बंधन पर बहनों को राखी बांधने से पहले तिलक और आरती की परंपरा निभानी चाहिए. इसके बाद शुभ समय में रक्षासूत्र बांधकर भाई की सुख समृद्धि और लंबी उम्र की कामना की जाती है.