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हजारों सालों से हनुमान जी से नाराज हैं इस गांव के लोग, नहीं करते पूजा, जानें कारण

Hanuman Ji: कहा जाता है कि अगर सच्चे मन से हनुमान जी की पूजा अर्चना की जाए तो वो सारे पाप हर लेते हैं. लेकिन भारत में एक ऐसा गांव भी जहां के लोग उनकी पूजा नहीं करते वो हनुमान जी से बहुत नाराज है. आखिर वहां के लोग हनुमान जी से क्यों नाराज हैं. आइए जानते हैं.

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Gyanendra Tiwari
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हाइलाइट्स

  • मेघनाथ का बाण से मुर्छित हो गए थे लक्ष्मण
  • संजीवनी बूटी के लिए पर्वत लाकर हनुमान ने बचाई थी जान

Hanuman Ji: कहा जाता है कि हनुमान जी को अमरता का वरदान मिला था. वो पृथ्वी पर आज भी मौजूद हैं. भारत के अलग-अलग स्थानों में बने हनुमान मंदिर में लोग उनकी पूजा अर्चना करते हैं. उनकी कहानियां प्रचलित हैं. उनके बहुत से भक्त मंगलवार और शनिवार को व्रत रखते हैं. कहा जाता है कि अगर सच्चे मन से हनुमान जी की पूजा अर्चना की जाए तो वो सारे पाप हर लेते हैं. लेकिन भारत में एक ऐसा गांव भी जहां के लोग उनकी पूजा नहीं करते वो हनुमान जी से बहुत नाराज है. आखिर वहां के लोग हनुमान जी से क्यों नाराज हैं. आइए जानते हैं.

लक्ष्मण के मूर्छित होने से जुड़ा है किस्सा

रामायण में कई पात्र हैं. हर एक पात्रा का अपना एक अलग महत्व है. राम भगवान जब 14 वर्ष के लिए वनवास जाते हैं तो उनके साथ उनके छोटे भाई लक्ष्मण और माता सीता भी जाती है. जब रावण माता सीता का अपहरण कर उन्हें लंका ले जाता है तो प्रभु श्रीराम लंका पहुंचते हैं. इसके बाद राम और रावण के बीच युद्ध होता है. इसी युद्ध में लक्ष्मण मूर्छित हो जाते है. दरअसल, उन्हें मेघनाथ का बाण लगता है और वो गिर जाते है. उनकी हालत बहुत ही नाजुक हो गई थी.  ये किस्सा हनुमान जी और उनसे गुस्सा हुए लोगों से जुड़ा. आगे आपको पता चलेगा आखिर एक गांव के लोग हनुमान जी की पूजा क्यों नहीं करते है.

द्रोणागिरी पर्वत में संजीवनी बूटी

सुशेन वैद्य ने बताया कि अब लक्ष्मण के प्राण केवल संजीवनी बूटी ही बचा सकती है. संजीवनी बूटी द्रोणागिरी पर मिलती. लक्ष्मण के प्राण बचाने के लिए राम के भक्त हनुमान जी द्रोणागिरी पर्वत पर पहुंच जाते हैं लेकिन उन्हें समझ नहीं आता है कि संजीवनी बूटी कौन सी है तो वो पूरा पहाड़ उठाकर ले जाते हैं. इसके बाद सुषेण वैद्य ने संजीवनी बूटी पहचान कर लक्ष्मण के प्राण बचाए.

श्रीलंका में है पर्वत

हनुमान जी द्रोणागिरी पर्वत को उठाकर ले गए तो वहां के निवासी उनसे नाराज हो गए. वो हनुमान जी से आज तक रुष्ट है. आज के समय में द्रोणागिरी पर्वत श्रीलंका में है. जब हनुमान जी पर्वत ले जा रहे थे तो इसके कुछ टुकडे़ रास्ते में भी गिरे थे. श्रीलंका में इस पर्वत को रूमास्सला पर्वत के नाम से पहचाना जाता है. हनुमान जी ने श्रीलंका में द्रोणागिरी पर्वत को टुकड़ों में जगह-जगह किया था.

इस गांव के लोग नहीं करते हनुमान जी की पूजा

हम जिस गांव की बात कर रहे हैं वो गांव भारत के उत्तराखंड के चमोली जिले में है. इस गांव का नाम नीति गांव है. यह जोशीमठ से 50 किलोमीटर दूर है. दरअसल, द्रोणागिरी पर्वत को नीति गांव के लोग पूजते थे. वहां के लोग मानते हैं कि हनुमान जी द्रोणागिरी पर्वत का एक हिस्सा उठा ले गए थे. उस वक्त नीति गांव के लोग पूजा कर रहे थे, जिससे उनकी पूजा खंडित हो गई थी. वहां के स्थानीयों का कहना है कि हनुमान जी ने पर्वत देवात की दाहिनी भुजा उखाड़ दी थी. इसी कारण नीति गांव के लोग उनसे गुस्सा है. वो उनकी पूजा नहीं करते.     

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First Published : 02 February 2024, 09:08 AM IST