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Kajari Teej Puja Samagri List: कल कजरी तीज पर पूजा में कुछ छूट न जाए! आज ही घर ले आएं ये जरूरी सामान

कजरी तीज का व्रत इस बार 31 अगस्त 2026, सोमवार को रखा जाएगा. यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना से जुड़ा है.

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Edited By: Reepu Kumari
Kajari Teej Puja Samagri List: कल कजरी तीज पर पूजा में कुछ छूट न जाए! आज ही घर ले आएं ये जरूरी सामान
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: कजरी तीज का त्योहार इस बार 31 अगस्त, सोमवार को मनाया जाएगा. भाद्रपद कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि से जुड़ा यह पर्व खासतौर पर महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है. विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र, सुख और वैवाहिक जीवन की खुशहाली की कामना से व्रत रखती हैं. वहीं, अविवाहित युवतियां भी अच्छे जीवनसाथी की कामना से यह व्रत करती हैं.

पूजा के लिए ये सामान रखें तैयार

कजरी तीज की पूजा के लिए साफ थाली, जल से भरा कलश, नारियल, आम के पत्ते, शिव-पार्वती और गणेशजी की तस्वीर या प्रतिमा रखी जा सकती है. इसके अलावा शुद्ध जल या गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से पंचामृत तैयार किया जाता है. रोली, कुमकुम, हल्दी, चंदन, अक्षत, पान, सुपारी और कच्चा सूत भी पूजा की तैयारी में शामिल रखें.

फूल, फल और दीपक भी न भूलें

पूजा के लिए धूप, अगरबत्ती, कपूर और घी या तेल का दीपक जरूरी सामान में रखे जा सकते हैं. फूलों के साथ बेलपत्र और दूर्वा भी पूजा की सामग्री में शामिल किए जाते हैं. प्रसाद के लिए केले, अनार, अमरूद जैसे मौसमी फल रखे जा सकते हैं. मिठाई में खीर, लड्डू, मालपुआ या अपने क्षेत्र में बनाए जाने वाले पारंपरिक पकवान का इस्तेमाल किया जा सकता है.

सोलह श्रृंगार की सामग्री भी रखें

कजरी तीज पर महिलाओं के सोलह श्रृंगार का भी विशेष महत्व माना जाता है. ऐसे में बिंदी, सिंदूर, कंगन, चुनरी, काजल, कंघी और महावर जैसी चीजें पहले से तैयार रखी जा सकती हैं. पूजा के दौरान कथा सुनने की परंपरा भी कई स्थानों पर है, इसलिए कजरी तीज व्रत कथा की पुस्तक भी साथ रखें. अर्पण के लिए दक्षिणा को लाल या पीले कपड़े में रख सकते हैं.

भगवान शिव-पार्वती से जुड़ा है पर्व

कजरी तीज को भगवान शिव और माता पार्वती की भक्ति से जोड़ा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी. इसी वजह से यह पर्व वैवाहिक सुख और दांपत्य जीवन की कामनाओं से जुड़ा माना जाता है. कई क्षेत्रों में महिलाएं व्रत के साथ लोकगीत गाती हैं और समूह में पूजा-अर्चना करती हैं.

पूजा में परंपरा के अनुसार करें तैयारी

कई क्षेत्रों में कजरी तीज के दौरान नीम की पूजा की परंपरा भी बताई जाती है. कुछ जगहों पर महिलाएं सजाए गए झूले पर बैठती हैं और लोकगीत गाती हैं. अगर आपके परिवार या क्षेत्र में ऐसी परंपरा है, तो पूजा स्थल या झूले की सजावट के लिए फूल और छोटे सजावटी सामान भी पहले से रख सकते हैं. पूजा सामग्री परिवार और स्थानीय परंपरा के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है, इसलिए अपनी परंपरा को प्राथमिकता दें.