विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में कर्मचारियों के हित में एक बड़ा फैसला लिया गया. सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा कवरेज के लिए वेतन सीमा को 15,000 से बढ़ाकर 25,000 रुपए प्रति माह करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी.
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस निर्णय की जानकारी देते हुए बताया कि न्यूनतम वेतन सीमा बढ़ने से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी अब अनिवार्य EPFO कवरेज के दायरे में आ जाएंगे. इससे न केवल कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट सेविंग्स का दायरा बढ़ेगा, बल्कि उन्हें कानूनी सामाजिक सुरक्षा भी प्राप्त होगी.
▪️#Cabinet approves enhancement of EPFO wage ceiling from Rs.15,000 to Rs.25,000 per month.
— PIB India (@PIB_India) September 16, 2026
▪️The decision is expected to bring more than 51 lakh additional employees within the ambit of mandatory EPFO coverage.
▪️The annual Government outgo is estimated at about Rs.11,339… pic.twitter.com/Tx7jR0O2n7
इससे पूर्व सितंबर 2014 में EPF वेतन सीमा को बढ़ाकर 15,000 रुपए किया गया था. पिछले एक दशक में वेतन वृद्धि, आय के बढ़ते स्तर और औपचारिक रोजगार के विस्तार को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है. कई राज्यों में न्यूनतम वेतन मौजूदा सीमा के करीब पहुंच चुका था, जिससे यह बदलाव आवश्यक हो गया था.
वेतन सीमा 25,000 होने से अब 15,000 से 25,000 रुपए के बीच वेतन पाने वाले कर्मचारी स्वचालित रूप से EPF के दायरे में आ जाएंगे. इसके साथ ही कर्मचारियों को कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) और कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा योजना (EDLI) के तहत बीमा और पेंशन सुरक्षा का लाभ भी मिलेगा.
इस प्रस्ताव को एक्सपेंडिचर फाइनेंस कमिटी द्वारा अनुमोदित किया गया था. इस नए कदम से सरकार का अनुमानित सालाना खर्च बढ़कर लगभग 11,339 करोड़ रुपए हो जाएगा. आगामी 5 वर्षों में इस योजना पर कुल अनुमानित खर्च 56,696 करोड़ रुपए होने का अनुमान है, जिससे देश का सामाजिक सुरक्षा ढांचा और अधिक मजबूत होगा.