नितेश तिवारी की फिल्म रामायण का पहला गाना 'जय जय राम' रिलीज होते ही चर्चा में है. गणेश चतुर्थी के मौके पर रिलीज हुए इस गाने में श्रीराम और माता सीता की प्रेम कहानी, विवाह, अयोध्या की गलियां और सीता स्वयंवर के दृश्य दिखाए गए हैं. इसी दौरान श्रीराम के धनुष उठाने का प्रसंग भी नजर आता है, जो रामायण की सबसे प्रसिद्ध घटनाओं में से एक है.
पौराणिक कथा के अनुसार मिथिला के राजा जनक ने माता सीता के स्वयंवर का आयोजन किया था. स्वयंवर में भगवान शिव का दिव्य धनुष पिनाक रखा गया था. राजा जनक की शर्त थी कि जो वीर इस धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने में सफल होगा, उसी के साथ सीता का विवाह होगा.
कई राजा और शक्तिशाली योद्धा स्वयंवर में पहुंचे, लेकिन कोई भी भगवान शिव के इस विशाल धनुष को उठा तक नहीं सका. इसके बाद गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से श्रीराम धनुष के पास पहुंचे. श्रीराम ने सहजता से भगवान शिव के धनुष को उठा लिया. जब वह उस पर प्रत्यंचा चढ़ाने लगे और धनुष को खींचा, तो वह टूट गया. धनुष टूटने की तेज आवाज से पूरी सभा गूंज उठी और वहां मौजूद राजा-महाराजा समेत सभी लोग हैरान रह गए.
रामचरितमानस में तुलसीदास जी ने धनुष टूटने के इस प्रसंग का वर्णन किया है. कथा के अनुसार श्रीराम ने धनुष उठाकर प्रत्यंचा चढ़ाने के लिए उसे खींचा और उसी क्षण धनुष टूट गया. इसकी भयंकर ध्वनि से स्वयंवर सभा में मौजूद लोग चकित रह गए. यह घटना केवल श्रीराम की शारीरिक शक्ति का प्रदर्शन नहीं मानी जाती, बल्कि इसे उनके दिव्य स्वरूप और धर्म की स्थापना से भी जोड़ा जाता है.
पिनाक के टूटने को कई धार्मिक व्याख्याओं में अहंकार और बाधाओं के समाप्त होने का प्रतीक माना जाता है. साथ ही यह श्रीराम और माता सीता के दिव्य मिलन की भूमिका तैयार करता है. स्वयंवर की शर्त पूरी होने के बाद माता सीता का विवाह श्रीराम से हुआ.
धनुष के टूटने को लेकर मिथिला क्षेत्र की स्थानीय मान्यताओं और लोककथाओं में एक खास विवरण मिलता है. इसके अनुसार पिनाक तीन हिस्सों में बंट गया था. एक हिस्सा आकाश की ओर चला गया, दूसरा पाताल लोक में गया और तीसरा पृथ्वी पर गिरा. स्थानीय मान्यता के अनुसार पृथ्वी पर गिरा हिस्सा वर्तमान नेपाल के धनुषधाम में गिरा था. यह स्थान जनकपुरधाम से करीब 18 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में बताया जाता है. यहां धनुष से जुड़ा एक धार्मिक स्थल है, जहां श्रद्धालु दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं.
हालांकि धनुष के तीन टुकड़ों के अलग-अलग स्थानों पर गिरने की बात स्थानीय धार्मिक मान्यता है, इसे रामायण के सभी प्रमुख मूल ग्रंथों में एक समान रूप से वर्णित तथ्य नहीं माना जाता. इसलिए इसे पौराणिक कथा और स्थानीय परंपरा के संदर्भ में देखना उचित है.