बेंगलुरु: कर्नाटक के बागलकोट जिले में नम्मा क्लिनिक में तैनात मेडिकल ऑफिसर डॉ. अंकिता यारगल जांच के घेरे में हैं. उन पर आरोप है कि वह लंबे समय तक क्लिनिक से अनुपस्थित रहीं और इसी दौरान एक निजी मेडिकल कॉलेज में स्नातकोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रम कर रही थीं. अधिकारियों के मुताबिक, उन्हें हर महीने 70 हजार रुपये से अधिक वेतन मिल रहा था. मामले में बागलकोट जिला पंचायत के CEO गजानन बाले ने जांच शुरू की है.
अधिकारियों की ओर से जारी नोटिस के अनुसार, डॉ. अंकिता यारगल 3 मार्च से सितंबर तक वांबे कॉलोनी स्थित नम्मा क्लिनिक में कथित तौर पर ड्यूटी से अनुपस्थित रहीं. इससे क्लिनिक में मेडिकल ऑफिसर नहीं रहा और मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा. प्रशासन ने इसे गंभीर मामला मानते हुए उनकी अनुपस्थिति और कार्य व्यवस्था से जुड़े दस्तावेजों की जांच शुरू की है.
जांच का दूसरा अहम पहलू यह है कि डॉ. यारगल कथित तौर पर निजी मेडिकल कॉलेज में PG की पढ़ाई कर रही थीं और उसी दौरान नम्मा क्लिनिक के मेडिकल ऑफिसर के रूप में वेतन भी ले रही थीं. प्रशासन ने इसे कथित अनधिकृत दोहरी नियुक्ति और सरकारी स्वास्थ्य सेवा से जुड़े नियमों के उल्लंघन का मामला माना है. हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम फैसला जांच पूरी होने के बाद ही होगा.
बागलकोट जिला पंचायत CEO गजानन बाले ने पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया था, लेकिन डॉ. यारगल उस जांच में उपस्थित नहीं हुईं. अब उन्हें 18 सितंबर को सुबह 10 बजे जिला पंचायत कार्यालय के कमरा नंबर 11 में होने वाली अगली जांच में पेश होने का निर्देश दिया गया है. नोटिस में चेतावनी दी गई है कि अनुपस्थिति की स्थिति में उनके खिलाफ एकतरफा फैसला लिया जा सकता है.
प्रशासन ने मामले में सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में काम करने वाले पंजीकृत डॉक्टरों पर लागू नियमों और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की पेशेवर आचार संहिता के संभावित उल्लंघन का भी उल्लेख किया है. अधिकारियों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो इसे पेशेवर कदाचार माना जा सकता है. ऐसी स्थिति में मामला कर्नाटक मेडिकल काउंसिल और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग को भी भेजा जा सकता है.
नोटिस में यह भी कहा गया है कि कथित अनधिकृत दोहरी जिम्मेदारी की अवधि में मिला पूरा वेतन या मानदेय लागू नियमों के तहत वापस लिया जा सकता है. बताया गया है कि SN मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने उन्हें अनुमति दी थी, लेकिन इसके बावजूद नम्मा क्लिनिक में उनकी उपस्थिति को लेकर सवाल उठे हैं. इस बीच, जिला स्वास्थ्य अधिकारी राजकुमार यारगल ने कथित तौर पर उन्हें ड्यूटी से हटा दिया है.