पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का दूसरा चरण 29 अप्रैल को होने जा रहा है, जिसमें 142 सीटों पर वोट डाले जाएंगे. यह चरण बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इन सीटों को ममता बनर्जी का मजबूत गढ़ माना जाता है. पिछली बार इन सीटों पर तृणमूल कांग्रेस का दबदबा रहा था. इस बार भारतीय जनता पार्टी भी पूरी ताकत के साथ मैदान में है, जिससे मुकाबला और दिलचस्प हो गया है.
साउथ कोलकाता की भवानीपुर सीट सबसे ज्यादा चर्चा में है. यहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का सामना बीजेपी के सुवेंदु अधिकारी से है. भवानीपुर लंबे समय से टीएमसी का गढ़ रहा है और ममता यहां से विधायक भी हैं. दूसरी ओर, सुवेंदु अधिकारी नंदीग्राम से विधायक हैं और दो सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं, जिससे मुकाबला काफी रोचक हो गया है.
कोलकाता पोर्ट सीट पर टीएमसी के फिरहाद हाकिम मैदान में हैं, जिनका मुकाबला भाजपा के राकेश सिंह और वाम दल के उम्मीदवार से है. वहीं टॉलीगंज सीट से मंत्री अरूप बिस्वास चुनाव लड़ रहे हैं. उनके सामने भाजपा और सीपीआईएम के उम्मीदवार हैं. यह सीट भी लंबे समय से टीएमसी के कब्जे में रही है.
बालीगंज सीट से वरिष्ठ नेता सोवनदेब चट्टोपाध्याय चुनाव लड़ रहे हैं. यहां भाजपा और वाम दल ने भी मजबूत उम्मीदवार उतारे हैं. श्यामपुकुर सीट पर टीएमसी की शशि पांजा के सामने भाजपा और अन्य दलों की चुनौती है. इन दोनों सीटों पर टीएमसी का पिछले कई वर्षों से दबदबा रहा है, लेकिन इस बार मुकाबला कड़ा माना जा रहा है.
दमदम सीट से शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु चुनाव मैदान में हैं. उनके खिलाफ भाजपा और वाम दल ने उम्मीदवार उतारे हैं. दमदम उत्तर से चंद्रिमा भट्टाचार्य चुनाव लड़ रही हैं. वहीं पानीहाटी सीट पर भी मुकाबला रोचक है, जहां टीएमसी ने नया चेहरा उतारा है. इन सीटों पर परिणाम राजनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.
रासबिहारी सीट को टीएमसी का मजबूत गढ़ माना जाता है. यहां भाजपा ने चर्चित उम्मीदवार उतारा है, जिससे मुकाबला दिलचस्प हो गया है. नौपाड़ा सीट पर भाजपा के अर्जुन सिंह मैदान में हैं, जिनका राजनीतिक सफर कई दलों से जुड़ा रहा है. इन सीटों पर नतीजे यह तय करेंगे कि क्या टीएमसी अपना दबदबा बनाए रखेगी या विपक्ष सेंध लगाने में सफल होगा.