नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के दूसरे चरण से पूर्व फलता निर्वाचन क्षेत्र में भारी राजनीतिक तनाव देखा जा रहा है. उत्तर प्रदेश के विख्यात 'सिंघम' और एनकाउंटर विशेषज्ञ आईपीएस अजय पाल शर्मा ने क्षेत्र में शांति भंग करने वालों को खुली चुनौती दी है. तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी जहांगीर खान पर वोटरों को आतंकित करने के आरोपों के बाद चुनाव आयोग द्वारा तैनात इस अधिकारी ने साफ कर दिया है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का व्यवधान अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा
क्षेत्रीय स्तर पर लगातार प्राप्त हो रही शिकायतों ने फलता में असुरक्षा का वातावरण निर्मित कर दिया था. निवासियों का दावा था कि जहांगीर खान उन्हें डराकर मतदान प्रभावित करने की चेष्टा कर रहे हैं. जब आईपीएस अजय पाल शर्मा जांच हेतु स्थल पर पहुंचे, तो प्रत्याशी वहां से नदारद थे. विडंबना यह रही कि स्थानीय पुलिसकर्मियों ने भी उनके आवास का सही विवरण साझा करने में कोई रुचि नहीं दिखाई. अंततः, सघन तलाशी के उपरांत पुलिस दल उनके ठिकाने तक पहुंचने में सफल रहा.
ये है उत्तरप्रदेश केडर के DiG अजय पाल शर्मा जिनकी ड्यूटी आजकल बंगाल में लगी हुई है ऑब्जर्वर के तौर पर, अजय पाल शर्मा जी की खासियत यह है की ये काम में लापरवाही बिल्कुल बर्दास्त नहीं करते हैं जनाब के तेवर देखकर ही वहाँ की की पुलिस और लोगो को समझ जाना चाहिए की शर्मा जी गलती करने पर… pic.twitter.com/yiJq0HNZG1
— Shakti Singh/शक्ति सिंह (@singhshakti1982) April 27, 2026Also Read
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जहांगीर खान के निवास पर पहुंचने के पश्चात पुलिस टीम एक असामान्य दृश्य की साक्षी बनी. वहां बंगाल पुलिस के कुल 14 सशस्त्र जवान सुरक्षा हेतु तैनात पाए गए. प्रारंभिक छानबीन में यह तथ्य सामने आया कि प्रत्याशी को केवल 'वाई' श्रेणी की सुरक्षा आवंटित है, जिसमें नियमानुसार अधिकतम 10 पुलिसकर्मियों की ही अनुमति है. नियत संख्या से अधिक जवानों की मौजूदगी ने चुनावी पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है. अधिकारी ने इस अतिरिक्त सुरक्षा कवच पर घोर आपत्ति प्रकट की.
स्थानीय पुलिस अधीक्षक से मांगा जवाब सुरक्षा मापदंडों के इस स्पष्ट उल्लंघन को गंभीरता से लेते हुए आईपीएस शर्मा ने स्थानीय पुलिस अधीक्षक को आधिकारिक कारण बताओ नोटिस जारी किया है. उन्होंने इस बात का विवरण मांगा है कि किस प्राधिकार या आदेश के तहत प्रत्याशी को अतिरिक्त सुरक्षा कर्मी उपलब्ध कराए गए. आयोग के सख्त दिशानिर्देशों के बावजूद ऐसी त्रुटियां प्रशासनिक मिलीभगत का अंदेशा पैदा करती हैं. इस त्वरित कार्यवाही ने पूरे जिला पुलिस तंत्र के भीतर हड़कंप की स्थिति पैदा कर दी है.
आईपीएस शर्मा ने प्रत्याशी के द्वार पर ही यह घोषणा की कि यदि लोकतान्त्रिक अधिकारों के हनन की शिकायत पुनः प्राप्त हुई, तो परिणाम अत्यंत घातक होंगे. अजय पाल शर्मा का यह वक्तव्य डिजिटल माध्यमों पर चर्चा का विषय बना हुआ है. उन्होंने दोटूक शब्दों में संदेश दिया कि जहांगीर को अवगत करा दें, दोबारा धमकाया तो प्रशासन कायदे से खबर लेगा. उनके इस कड़े रुख ने उपद्रवियों में भय व्याप्त कर दिया है.
चुनाव प्रशासन की सतर्क दृष्टि अब प्रत्याशी के परिजनों और निकटवर्तियों पर भी केंद्रित है. जहांगीर खान के भतीजे एवं अन्य संबंधियों को स्पष्ट हिदायत दी गई है कि वे निर्वाचन प्रक्रिया में तनिक भी दखल न दें. अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि किसी भी स्तर पर जनमत को प्रभावित करने का प्रयास किया गया, तो प्रशासन बिना विलंब के कठोर दंडात्मक कदम उठाएगा. यह संपूर्ण घटनाक्रम अब बंगाल चुनाव में पारदर्शिता और प्रशासनिक उत्तरदायित्व का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है.