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थलपति का कांटों भरा रास्ता: विजय के हाथ में तमिलनाडु CM की कुर्सी लेकिन सफर नहीं आसान, सामने ये 10 बड़ी बाधाएं

तमिलनाडु में विजय की संभावित सरकार के सामने राजनीतिक स्थिरता, आर्थिक दबाव, विपक्ष, कानून व्यवस्था और प्रशासनिक अनुभव जैसी बड़ी चुनौतियां होंगी. चलिए जानते हैं क्या-क्या आ सकती हैं चुनौतियां.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
थलपति का कांटों भरा रास्ता: विजय के हाथ में तमिलनाडु CM की कुर्सी लेकिन सफर नहीं आसान, सामने ये 10 बड़ी बाधाएं
Courtesy: Pinterest

चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेता विजय का मुख्यमंत्री बनना एक बड़ा राजनीतिक बदलाव माना जा रहा है लेकिन सत्ता तक पहुंचने के बाद उनके सामने कई बड़ी चुनौतियां खड़ी होंगी, जो उनके कार्यकाल की दिशा तय करेंगी. तमिलगा वेट्री कझगम की सरकार बनने की स्थिति में विजय को शुरुआत से ही कई मोर्चों पर खुद को साबित करना होगा.

सबसे बड़ी चुनौती राजनीतिक स्थिरता की होगी. पार्टी अकेले बहुमत से दूर रही है, इसलिए उसे कांग्रेस, वाम दलों और Viduthalai Chiruthaigal Katchi यानी VCK जैसे सहयोगियों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है. ऐसे में गठबंधन की राजनीति सरकार को अस्थिर बना सकती है.

क्या है दूसरी बड़ी चुनौती?

दूसरी बड़ी चुनौती फिल्मों से प्रशासन तक का सफर है. विजय ने बड़े पर्दे पर जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की है लेकिन सरकार चलाना अलग जिम्मेदारी है. उन्हें प्रशासनिक अनुभव की कमी से भी जूझना पड़ सकता है.

क्या हो सकती है तीसरी चुनौती?

तीसरी चुनौती मजबूत टीम बनाना है. तमिलगा वेट्री कझगम नई पार्टी है और इसके कई विधायक पहली बार राजनीति में आए हैं. अनुभवी मंत्रियों और अधिकारियों की टीम तैयार करना आसान नहीं होगा.

क्या है चौथी चुनौती?

एम.के. स्टालिन की DMK विपक्ष में रहते हुए भी मजबूत ताकत बनी रहेगी. डीएमके का मजबूत कैडर और संगठन विजय सरकार पर लगातार दबाव बना सकता है.

क्या है पांचवी चुनौती?

AIADMK भी अभी पूरी तरह कमजोर नहीं हुई है. ग्रामीण इलाकों में उसका प्रभाव बना हुआ है, जिससे राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं.

क्या है छठी चुनौती?

राज्य की आर्थिक स्थिति भी विजय के लिए बड़ी चुनौती होगी. युवाओं को रोजगार, उद्योगों में निवेश और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाना उनकी प्राथमिकता होगी.

क्या है सातवीं चुनौती?

विजय के फैंस उनसे फिल्मों जैसी तेज कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं. अगर फैसलों में देरी हुई तो नाराजगी बढ़ सकती है.

क्या है आठवीं चुनौती?

केंद्र सरकार के साथ रिश्ते भी अहम होंगे. BJP के साथ मतभेद NEET, जीएसटी और भाषा नीति जैसे मुद्दों पर टकराव बढ़ा सकते हैं.

क्या है नौवीं चुनौती?

कानून व्यवस्था बनाए रखना भी शुरुआती चुनौती होगी. सत्ता परिवर्तन के बाद राजनीतिक तनाव बढ़ सकता है.

क्या है दसवीं चुनौती?

सबसे अहम सवाल यह है कि विजय अपनी अलग विचारधारा कैसे बनाएंगे. सिर्फ विरोध की राजनीति से आगे बढ़कर उन्हें मजबूत शासन मॉडल पेश करना होगा.