पश्चिमी अफ्रीका के एक देश माली से इन दिनों कई हमलें की खबर सामने आई है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पिछले कुछ दिनों के अंदर कई हमलों में 70 लोगों की मौत हो गई. हालांकि कुछ रिपोर्ट में इस संख्या को और भी ज्यादा बताया गया है. इन हमलों की जिम्मेदारी अल कायदा से जुड़े संगठन जमात नुसरत अल इस्लाम वल मुस्लिमीन ने अपने ऊपर ली है.
माली में एक बार फिर शुक्रवार को कई हमले हुए, उससे पहले बुधवार को किए गए हमले में दो दर्जन से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी. यह आतंकी संगठन उन गांवों को निशाना बना रहे हैं, जिन्होंने समझौते पर साइन करने से मना कर दिया.
देश में चल रहे इस हालात पर लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है. हालांकि वहां के युवा नेता ने इन सब हमलों को लेकर सेना पर गंभीर आरोप लगाया. उनका कहना है कि हमारे पास सेना और हमने बार-बार मदद भी मांगी है, हमारे लोगों की जान जा रही है, फिर भी उन्होंने कोई हस्तक्षेप नहीं किया. यह हमले और भी ज्यादा तेज तब हुआ जब हथियारबंद लड़ाकों ने माली की राजधानी बामको से कुछ दूरी पर स्थित सेंट्रल जेल पर हमला बोल दिया.
उन्होंने जब हमला किया तब उस समय जेल में लगभग 2,500 कैदी बंद थे. इन कैदियों में 72 ऐसे भी कैदी हैं, जो देश की सुरक्षा के लिहाज से काफी गंभीर हैं. माली के लिए हालात तब और ज्यादा चिंताजनक हो गई जब आतंकी समूह की ओर से घोषणा की गई कि वह शहरों पर चेकपॉइंट बनाकर शहर पर पूरी तरह से घेराबंदी करने की तैयारी में है.
सुरक्षा की जानकारी देते हुए माली की सेना ने इस बात को माना है कि अभी भी खतरा है. उन्होंने बताया कि ऐसे हमले तब और ज्यादा तेज हो गए जब जमात नुसरत अल इस्लाम वल मुस्लिमीन ने तुआरेग बहुल अजावाद लिबरेशन फ्रंट यानी FLA से हाथ मिला लिया. इसके बाद उनकी ओर से किए गए हमले में माली के रक्षा मंत्री सादियो कैमारा की मौत हो गई थी. इसके बाद माली में खड़े रूसी सैनिकों को उत्तरी शहर किडल को छोड़कर पीछे हटने के लिए मजबूर होना पड़ा. हालांकि माली सेना की ओर से कहा गया कि इन विद्रोहियों पर कंट्रोल करने के लिए लगातार ऑपरेशन चलाए जा रहे है.