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ट्रिब्यूनल से क्लीन चिट पाए लोग बंगाल चुनाव में डाल सकेंगे वोट, ममता बोलीं- मुझे सुप्रीम कोर्ट पर गर्व

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में ट्रिब्यूनल से क्लीन चिट पाने वालों को वोटिंग का अधिकार देने का आदेश दिया है. ममता बनर्जी ने SC के इस फैसले पर गर्व जताया है. राज्य में मतदाता सूचि से नाम हटाए जाने को लेकर 34 लाख से अधिक मामले लंबित थे.  

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
ट्रिब्यूनल से क्लीन चिट पाए लोग बंगाल चुनाव में डाल सकेंगे वोट, ममता बोलीं- मुझे सुप्रीम कोर्ट पर गर्व
Courtesy: pinterest

पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल गरमाने के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक आदेश दिया है. अब वे लोग जिन्हें ट्रिब्यूनल से क्लीन चिट मिल चुकी है, वह मतदान कर सकेंगे. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट पर गर्व है. दरअसल, राज्य में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर 34 लाख से अधिक अपीलें लंबित थीं. अब SC ने संविधान के अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए स्पष्ट समयसीमा तय कर दी है. 

ट्रिब्यूनल का फैसला होगा अहम

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, पश्चिम बंगाल में पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को होना है. जिन लोगों की अपील पर 19 स्पेशल अपीलेट ट्रिब्यूनल 21 अप्रैल तक फैसला सुना देंगे, वे पहले चरण में वोट डाल सकेंगे. यह उन लाखों नागरिकों के लिए राहत भरा फैसला है, जिनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए थे या जिन पर आपत्तियां दर्ज थीं. कोर्ट ने साफ कहा कि किसी भी पात्र मतदाता को उसके लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित नहीं रखा जाएगा.  

दूसरे चरण के लिए भी समयसीमा तय

दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होगा. इसके लिए SC ने निर्देश दिया है कि जिनकी अपील पर 27 अप्रैल तक ट्रिब्यूनल फैसला दे देगा, वे इस चरण में मतदान कर सकेंगे. यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि ट्रिब्यूनल से क्लीन चिट पाने वालों को तुरंत मतदान का अधिकार मिल जाए. अदालत ने यह भी कहा कि ट्रिब्यूनल प्राथमिकता के आधार पर इन मामलों का निपटारा करें. राज्य चुनाव आयोग को निर्देश दिए गए हैं कि वह ऐसे मतदाताओं के लिए व्यवस्था करे.  

ममता बनर्जी ने किया स्वागत

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस फैसले पर खुशी जताते हुए कहा, "मुझे सुप्रीम कोर्ट पर गर्व है. उन्होंने लोकतंत्र की मजबूती के लिए यह ऐतिहासिक फैसला दिया है." उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के दबाव में कुछ लोग मतदाताओं को वंचित करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन SC ने सच्चाई को सम्मान दिया. ममता ने कहा कि अब जिन लोगों को अन्याय झेलना पड़ा था, वे अपने वोट का अधिकार पाएंगे. उन्होंने ट्रिब्यूनल से अपील की कि वह समयसीमा का पालन करें.  

लोकतंत्र के लिए बड़ा फैसला

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश लोकतंत्र की जीत है. 34 लाख से अधिक लंबित अपीलों के कारण बड़ी संख्या में मतदाता अनिश्चितता में थे. SC ने न केवल समयसीमा तय की बल्कि यह भी सुनिश्चित किया कि ट्रिब्यूनल के फैसले के बाद किसी को रोका न जाए. यह फैसला देश के चुनावी इतिहास में मील का पत्थर माना जा रहा है. आम लोगों में राहत और उत्साह का माहौल है, क्योंकि अब वे बिना किसी डर के अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकेंगे.