एनडीए और विपक्षी दलों के बीच लंबे समय से विवाद का मुद्दा रही परिसीमन प्रक्रिया पर प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को आश्वासन देते हुए कहा कि परिसीमन पर किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं होगा. लोकसभा में बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा, 'मैं इस बात की गारंटी देता हूं कि पूर्व से पश्चिम, उत्तर से दक्षिण तक किसी भी राज्य के साथ कोई अन्याय नहीं होगा.'
बता दें कि लोकसभा में पेश किए गए तीन विधेयकों पर बहस के लिए विशेष सत्र बुलाया गया है. मतदान में विभाजन के बाद महिला आरक्षण बिल में संशोधन के लिए संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पेश किया गया. केंद्र शासित प्रदेशों जैसे पुडुचेरी, जम्मू-कश्मीर और दिल्ली में प्रस्तावित महिला आरक्षण बिल लागू करने के लिए दो साधारण विधेयक केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक और परिसीमन विधेयक पेश किया गया. आज सदन में इन विधेयकों पर चर्चा होगी और कल इन पर मतदान होगा.
सत्र की शुरुआत एनडीए और विपक्ष के बीच तीखी बहस से हुई जिसके बाद विपक्ष ने संवैधानिक (131वां संशोधन) विधेयक पेश करेन से पहले मत विभाजन पर जोर दिया. अंत में विधेयक को 251 सांसदों के समर्थन और 185 सांसदों के विरोध के साथ पेश किया गया.
प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्षी सांसदों से कहा कि वे महिला आरक्षण विधेयक को राजनीतिक नजरिए से ना देखें. उन्होंने चेतावनी दी कि अतीत में जिन लोगों ने महिला आरक्षण की अवधारणा का विरोध किया देश की महिलाओं ने उन्हें माफ नहीं किया.
संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के तहत केंद्र सरकार ने लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव रखा है जिसमें 815 सीटें राज्यों के लिए और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए आरक्षित होंगी. इससे परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक को पारित करने का मार्ग प्रशस्त होगा जिससे महिलाओं के लिए आरक्षित आरक्षण कानून लागू हो सकेगा. हालांकि विपक्षी दलों द्वारा शासित दक्षिण भारत के राज्य इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं. उनका तर्क है कि परिसीमन ने हिंदी भाषी राज्यों जो भाजपा का गढ़ हैं, को काफी लाभ होगा.
दक्षिण भारतीय राज्यों के मुख्यमंत्रियों जैसे तमिलनाडु के एमके स्टालिन, केरल के पिनारयी विजयन, तेलंगाना के रेवंत रेड्डी और कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया ने इसे राज्यों के लिए अनुचित बताया है क्योंकि उन्होंने अपने राज्यों में जनसंख्या नियंत्रण के प्रभावी उपाय लागू किये हैं. उन्होंने इंडिया ब्लॉक के सदस्यों के साथ मिलकर तर्क दिया है कि परिसीमन भाजपा का एक राजनीतिक हथियार है जिसका उद्देश्य दीर्घकालिक चुनावी लाभ सुनिश्चित करना है.