मिडिल ईस्ट में जारी भारी तनाव और युद्ध के बीच दुनियाभर के फुटबॉल फैंस के लिए एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है. FIFA अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि तमाम राजनीतिक अड़चनों के बावजूद, 2026 के फीफा वर्ल्ड कप में ईरान की टीम हिस्सा लेगी और अमेरिका में खेलने आएगी.
इस साल 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद हफ्तों तक खौफनाक हवाई हमलों और जवाबी कार्रवाइयों का दौर चला था. हालांकि, 8 अप्रैल को एक कमजोर युद्धविराम लागू हो चुका है, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य में पाबंदियों और ईरानी बंदरगाहों पर संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा लागू किए गए समुद्री उपायों के कारण टेंशन अब भी चरम पर है.
इसी तनावपूर्ण माहौल के बीच बुधवार को एक आर्थिक सम्मेलन में बोलते हुए इन्फेंटिनो ने स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने कहा, "ईरान निश्चित रूप से आ रहा है. ईरान को आना ही होगा; वे अपने लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं, उन्होंने क्वालिफ़ाई किया है, और खिलाड़ी खेलना चाहते हैं".
संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल के बीच इस साल की शुरुआत में हुए संघर्ष को देखते हुए ईरान की भागीदारी पर अनिश्चितता के गहरे बादल मंडरा रहे थे. हालात इतने बिगड़ गए थे कि टीम ने टूर्नामेंट के बहिष्कार तक का मन बना लिया था. उन्होंने FIFA से गुजारिश की थी कि उनके मैच अमेरिका से बाहर किसी और जगह शिफ्ट कर दिए जाएं. FIFA ने इस प्रस्ताव को सिरे से ठुकरा दिया.
अब एशियाई टीम ईरान को अपने ग्रुप G के मैच अमेरिका में ही खेलने हैं, जिनमें से दो मुकाबले लॉस एंजिल्स और एक सिएटल में खेला जाएगा. इस दौरान पूरी टीम का बेस कैंप एरिजोना के टक्सन शहर में रहेगा.
यह विवाद तब और गहरा गया था जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यह कहकर सनसनी मचा दी थी कि ईरानी खिलाड़ी अमेरिका में सुरक्षित नहीं भी हो सकते हैं. इसके बाद इन्फेंटिनो ने मार्च में तुर्की के अंताल्या में ईरान और कोस्टा रिका के बीच हुए एक दोस्ताना मैच में शामिल होने के दौरान भी ऐसी ही टिप्पणियां की थीं.
खेल को राजनीति से ऊपर रखने के FIFA के कड़े रुख को दोहराते हुए इन्फेंटिनो ने कहा, "खेल को राजनीति से बाहर रहना चाहिए. अगर कोई और ऐसा नहीं है जो आपसी पुल बनाने और उन्हें मजबूत व एकजुट बनाए रखने में विश्वास रखता हो, तो हम यह काम कर रहे हैं".
अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको की संयुक्त मेजबानी में हो रहा यह मेगा इवेंट 11 जून से शुरू होने वाला है. यह इतिहास का पहला ऐसा संस्करण होगा जिसमें 48 टीमें हिस्सा लेंगी. अब पूरी दुनिया की नजरें जून में अमेरिका में होने वाले ईरान के आगामी मैचों पर टिकी हैं, और FIFA को उम्मीद है कि तब तक हालात पूरी तरह शांत हो जाएंगे..