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India Daily

नीदरलैंड में बसे बिहार के दंपती ने वरली आर्ट में उकेरी संपूर्ण रामायण, पीएम मोदी की सोच से हुए प्रेरित

नीदरलैंड में रह रहे बिहार के जयंत शांडिल्य और रूचि सौम्या ने महाराष्ट्र की पारंपरिक वरली आर्ट में संपूर्ण रामायण को उकेरा है. उन्होंने बताया कि पीएम नरेंद्र मोदी की राम मंदिर वाली सोच से प्रेरित होकर यह अनोखी पेंटिंग बनाई गई.

Dhiraj Kumar Dhillon
नीदरलैंड में बसे बिहार के दंपती ने वरली आर्ट में उकेरी संपूर्ण रामायण, पीएम मोदी की सोच से हुए प्रेरित
Courtesy: DD News

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जब शनिवार को नीदरलैंड पहुंचने पर प्रवासी समुदाय ने पूरे जोश खरोश के साथ स्वागत किया तो उन्होंने कहा था कि मां भारती की संतानें जहां भी रहती हैं अपनी विरासत को समेटे रहती हैं. मूलरूप से बिहार के मुजफ्फरपुर के रहने वाले जयंत शांडिल्य और रूचि सौम्या 10 साल से नीदरलैंड में रह रहे हैं. उन्होंने महाराष्ट्र की पारंपरिक वरली आर्ट से संपूर्ण रामायण को दर्शाने का बड़ा काम किया है.

पीएम मोदी की अयोध्या मंदिर वाली सोच ने किया प्रभावित

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जयंत शांडिल्य ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अयोध्या में श्रीराम मंदिर की सोच से प्रभावित होकर संपूर्ण रामायण को वरली आर्ट में उकेरने का फैसला लिया. उनके इस जज्बे ने प्रवासी भारतीयों के अपनी विरासत और परंपराओं के जुड़ाव की बड़ी बानगी पेश करने का काम किया है. 

राम मंदिर निर्माण को समर्पित है पेंटिंग

रूचि सौम्या ने बताया कि हमारा यह खास पेंटिंग श्रीराम मंदिर को समर्पित है. पेंटिंग में दशरथ का यज्ञ, रामचंद्र जी का बाल्यकाल और रामायण की सभी घटनाओं को वरली आर्ट में उकेरा गया है. उन्होंने बताया कि विशाल रामायण का सूक्ष्म में प्रदर्शन करने के लिए ज्यामितीय आकारों का उपयोग किया गया है. 

जानिए क्या है वरली आर्ट?

बता दें कि वरली आर्ट महाराष्ट्र की प्राचील लोक कला है. जो मुख्य रूप से ठाणे और पालघर आदि जिलों में पाई जाने वाले आदिवासी जनजाति द्वारा बनाई जाती है. यह कला सरल ज्यामितीय आकारों के द्वारा नेचर, ग्रामीण जीवन और खेतीवाड़ी से जुड़े नजारे दर्शाने के लिए मिट्टी लाल दीवारों पर चावल के आटे का सफेद पेस्ट तैयार कर चित्रित की जाती है.