menu-icon
India Daily
share--v1

कौन था वह बादशाह जिसने भारत में सबसे पहले चलाया था 'रुपया', पढ़िए पूरी कहानी

Rupaya in India: भारत में रुपया ही आधिकारिक मुद्रा है लेकिन क्या आप इसके इतिहास के बारे में जानते हैं. आइए समझतें है कि रुपया कब और कहां से शुरू हुआ था.

auth-image
India Daily Live
Indian Currency
Courtesy: Social Media

दुनियाभर में मुद्राओं को अलग-अलग नामों से जाना जाता है. अमेरिका में डॉलर, जापान में येन तो अरब में दीनार है. भारत की मुद्रा को रुपया कहते है. साथ ही पाकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल, मॉरीशस और सेशल्स की मुद्रा को भी रुपया कहते है. पुराने समय में भारत की मुद्रा को अलग-अलग नामों से जाना जाता था. कभी मुहर, कभी दाम, कभी टका तो कभी आना. बदलते समय के साथ भारत में मुद्रा को अलग-अलग नामों से जाना गया. 

खास बात यह है कि समय के साथ रुपये के रूप में तो बदलाव आया लेकिन इसके नाम में कोई बदलाव नही आया. चलिए जानते हैं कि भारत में पहला शासक कौन था जिसने भारतीय मुद्रा का नाम रुपया रखा. तब से अब तक भारत की करेंसी को रुपया ही कहा जा रहा है और अब यही रुपया दुनियाभर में अपनी पहचान भी बना रहा है.

रुपया शब्द संस्कृत के रुप या रुप्याह से लिया गया है. जिसका मतलब होता है कच्ची चांदी और रुप्यकम का मतलब होता है चांदी का सिक्का. इतिहास में पहली बार व्यवस्थित ढंग से चांदी के सिक्के की शुरुआत शेरशाह सूरी ने अपने शासनकाल में की थी. शेरशाह सूरी ने ही सबसे पहले अपनी मुद्रा को रुपया कहा. शेरशाह सूरी ने जो रुपया चलाया वह चांदी का सिक्का था. जिसका  भार लगभग 178 ग्रेन था. 

शेरशाह सूरी ने चलवाए थे तांबे और सोने के सिक्के

हालांकि, शेरशाह सूरी ने तांबे और सोने का भी सिक्का चलवाया जिसका नाम दाम और मोहर रखा गया. बाद में मुगलों के शासनकाल से लेकर अंग्रेजों के शासनकाल तक इन सिक्कों का चलन रहा. उस समय एक मोहर के बदले में चांदी के 16 सिक्के देने पड़ते थे. शेरशाह सूरी का चलाया चांदी का रुपया मुगलों के शासनकाल में भी खूब चला. मुगलों ने भी तांबे सिक्के के जिसे दाम कहा जाता था उसे शेरशाह सूरी की तर्ज पर ही चलाया. इसका वजन उन्होंने 320-330 ग्रेन रखा. 

मुगल बादशाह अकबर ने अपने शासनकाल में गोल और वर्गाकार दोनों आकार में सिक्के चलवाए. साल 1579 में अकबर ने अपने नए धार्मिक पंथ दीए-ए-इलाही के प्रचार-प्रसार के लिए इलाही नाम से सोने के सिक्के चलवाए. उस समय एक इलाही सिक्के का दाम 10 रुपये था. 

1857 की क्रांति के बाद, अंग्रेजों ने रुपये को गुलाम भारत की ऑफिशियल मुद्रा बना दिया. 19वीं सदी तक आते-आते अंग्रेजों ने कागजी रुपये की शुरुआत कर दी. 1861 के पेपर करेंसी एक्ट के तहत अंग्रेजों ने भारत में बड़े स्तर पर मुद्रा छापने का एकाधिकार ले लिया. आज आजाद भारत में आरबीआई अधिनियम 1934 के तहत मुद्रा जारी की जाता है.