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महाभारत का खूंखार योद्धा जिसे कलियुग में भरना पड़ रहा टैक्स, आखिर कैसे? समझ लीजिए

केरल के कोल्लम में महाभारत के विलन माने जाने वाले 'दुर्योधन' का मंदिर है. खास बात ये कि इस मंदिर में उनकी मूर्ति नहीं है, बल्कि उनके गदा की पूजा होती है. हिंदू धर्म में भले ही दुर्योधन को विलन माना जाता है, लेकिन यहां के लोग उन्हें देवता और रक्षक मानकर पूजा करते हैं. एक फैक्ट ये भी कि महाभारत के इस खूंखार योद्धा को कलयुग में टैक्स भी भरना पड़ता है. आखिर कैसे, आइए समझते हैं.

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महाभारत का खूंखार योद्धा जिसे कलियुग में भरना पड़ रहा टैक्स, आखिर कैसे? समझ लीजिए

देशभर में मंदिरों को कमाई पर टैक्स नहीं देना होता है, लेकिन अगर आपको बताया जाए कि एक मंदिर ऐसा भी है, जहां के 'देवता' महाभारत काल के हैं और जिस जमीन पर मंदिर बना है, उसके लिए उस 'देवता' को टैक्स देना होता है, तो आप क्या कहेंगे. आप कहेंगे कि ऐसा नहीं होता, लेकिन ये बिलकुल सच है. केरल के कोल्लम में महाभारत के विलन कहे जाने वाले दुर्योधन का एक मंदिर है, जो राज्य सरकार को टैक्स देता है. दुर्योधन के नाम पर ही जमीन का लगान यानी टैक्स कटता है. मंदिर में कौरव वंश के खूंखार योद्धा दुर्योधन की कोई मूर्ति नहीं है, बल्कि यहां उनके गदा की पूजा होती है.

केरल के सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, सबसे बड़े कौरव राजकुमार दुर्योधन यहां टैक्स अदा करते हैं. कहानियों के मुताबिक, अपनी यात्रा के दौरान दुर्योधन कोल्लम गांव में पहुंचे थे और वे काफी थके हुए थे. वे पानी की तलाश में थे. इसी दौरान एक दलित महिला ने उन्हें ताड़ी पिलाई थी. इसके बाद दुर्योधन ने महिला और पूरे गांव को आशीर्वाद दिया और गांव की जमीन दान में दे दी. इसके बाद दान में मिली जमीन पर गांववालों ने दुर्योधन का मंदिर बनाया और उनके गांव की पूजा की जाने लगी. गांव के लोग प्यार से दुर्योधन को 'दादा' कहते हैं.

मंदिर में हर दिन चढ़ाई जाती है ताड़ी

पेरुविरुथी मलानाडा मंदिर में 'देवता दुर्योधन' को हर दिन ताड़ी चढ़ाई जाती है. महाभारत की कहानी के मुताबिक, दुर्योधन ने ही द्रौपदी को निर्वस्त्र करने का आदेश दिया था और पांडवों से उनका राज्य छिन लिया था. कहा जाता है कि दुर्योधन की वजह से ही महाभारत का युद्ध हुआ था. दुर्योधन को कौरव वंश में काफी खूंखार माना जाता है। लेकिन केरल के पेरुविरुथी मलानाडा मंदिर में दुर्योधन को सौम्य, सुरक्षा प्रदान करने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है. गांव के लोग दुर्योधन को प्यार से 'अप्पूपा' यानी दादा कहते हैं.

मंदिर में ताड़ी चढ़ाए जाने के सवाल पर गांव के लोगों का कहना है कि ताड़ी चढ़ाने से देवता का मूड हल्का और खुशनुमा रहता है. जहां तक टैक्स देने का सवाल है, गांव के लोग बताते हैं कि ये टैक्स मंदिर के आसपास के पोरुवाझी गांव में मंदिर की 15 एकड़ ज़मीन पर लगाया जाता है. ये जमीन का पट्टा दुर्योधन के नाम पर ही. 

थंडापर (भूमि विलेख) संख्या और सर्वे डिटेल से पता चलता है कि गांव की 15 एकड़ जमीन दुर्योधन की है. जब से केरल में टैक्स की शुरुआत हुई है, तब से ये लैंड टैक्स दुर्योधन के नाम पर चुकाया जाता है. मंदिर समिति के सचिव रजनीश आर ने कहा कि मंदिर की 15 एकड़ भूमि में से आठ एकड़ धान के खेत हैं, बाकी जमीन पर जंगल है.