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सिक लीव के दिन वर्कर चला 16000 कदम, कंपनी ने नौकरी से निकाला, कोर्ट के इंसाफ ने जीता दिल

चीन के जिआंगसू प्रांत में एक कर्मचारी को बीमारी की छुट्टी पर पैर में चोट का नाटक करने के आरोप में नौकरी से निकाल दिया गया था. कर्मचारी चेन ने 2019 में पीठ और पैर की चोट के कारण छुट्टी ली थी और अस्पताल के मेडिकल प्रमाणपत्र भी जमा किए थे. कंपनी को शक हुआ और उसने चेन को झूठ बोलने का आरोप लगाकर बर्खास्त कर दिया.

Kanhaiya Kumar Jha
Edited By: Kanhaiya Kumar Jha
company fired an employee India Daily
Courtesy: Gemini AI

नई दिल्ली: चीन के जिआंगसू प्रांत में एक मामले ने हाल ही में फिर से नई चर्चा छेड़ दी है, कंपनी के कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर. यह मामला एक ऐसे कर्मचारी से जुड़ा है जिसे बीमारी की छुट्टी लेने के बाद नौकरी से निकाल दिया गया था.  न्याय मंत्रालय द्वारा 29 अक्टूबर को इस घटना को दोबारा सामने लाने के बाद सोशल मीडिया पर नियोक्ता और कर्मचारी के अधिकारों को लेकर बड़ी बहस शुरू हो गई. 

क्या है पूरा मामला?

यह मामला चेन नाम के एक कर्मचारी से जुड़ा है, जो जिआंगसू की एक कंपनी में काम करता था.  फरवरी और मार्च 2019 में उसे काम करते समय पीठ में खिंचाव आ गया, जिसके चलते उसने दो बार बीमारी की छुट्टी ली.  उसने अस्पताल से मिले मेडिकल प्रमाणपत्र भी जमा किए और छुट्टी मंजूर हो गई.  लगभग एक महीने बाद जब वह वापस लौटा, तो कुछ ही घंटों में उसने फिर से छुट्टी के लिए आवेदन किया.  इस बार उसने बताया कि उसके दाहिने पैर में दर्द है.  डॉक्टर ने उसे एक हफ्ते आराम करने की सलाह दी, और बाद में जांच में पाया गया कि उसकी एड़ी में चोट है. 

कंपनी का शक और विवाद की शुरुआत

चेन ने अपनी बीमारी की छुट्टी कई दिनों तक बढ़ाई, जिससे कंपनी को संदेह हुआ कि वह झूठ बोल रहा है.  कंपनी ने उसे नए मेडिकल दस्तावेज़ लाने के लिए बुलाया, लेकिन जब वह कंपनी पहुंचा तो सुरक्षा गार्ड ने उसे अंदर नहीं जाने दिया.  कुछ दिनों बाद कंपनी ने उसे अनुपस्थिति और झूठ बोलने के आरोप में नौकरी से निकाल दिया. 

कानूनी लड़ाई और सबूतों की जंग

नौकरी से निकाले जाने के बाद चेन ने श्रम अदालत में शिकायत दर्ज की.  उसने कहा कि उसके पास सभी मेडिकल सबूत हैं और उसकी छुट्टी पूरी तरह जायज थी.  जांच के बाद अधिकारियों ने चेन के पक्ष में फैसला सुनाया और कंपनी को करीब 1,18,779 युआन (लगभग 16,700 अमेरिकी डॉलर) का मुआवजा देने का आदेश दिया. 

हालांकि, कंपनी ने इस फैसले को अदालत में चुनौती दी.  उसने निगरानी कैमरे के फुटेज दिखाए जिसमें चेन को दौड़ते हुए देखा गया था और चैट रिकॉर्ड भी पेश किए जिनसे दावा किया गया कि उसी दिन उसने 16,000 से ज्यादा कदम चले थे. 

अदालत का अंतिम फैसला

लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने पाया कि कंपनी के पास पुख्ता सबूत नहीं हैं कि चेन ने झूठ बोला था.  मेडिकल रिपोर्ट और दस्तावेज़ों से यह साबित हुआ कि वह वास्तव में घायल था.  अदालत ने कंपनी की बर्खास्तगी को गैरकानूनी बताया और चेन को मुआवजा देने का आदेश कायम रखा