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India Daily

'धन्यवाद मैडम...' 1 घंटे इंतजार के बाद भी कैब ड्राइवर ने महिला को कहा थैंक्यू, वजह हो रही वायरल

आमतौर पर अगर किसी कैब ड्राइवर को 10 मिनट भी इंतजार करना पड़े, तो वह नाराज हो जाता है. लेकिन बेंगलुरू का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें कैब ड्राइवर ने महिला को 1 घंटे इंतजार करने के बाद धन्यवाद कहा.

Shilpa Shrivastava
'धन्यवाद मैडम...' 1 घंटे इंतजार के बाद भी कैब ड्राइवर ने महिला को कहा थैंक्यू, वजह हो रही वायरल
Courtesy: AI Generated

नई दिल्ली: आमतौर पर अगर किसी कैब ड्राइवर को 10 मिनट भी इंतजार करना पड़े, तो वह नाराज हो जाता है. कई बार ड्राइवर राइड कैंसिल भी कर देते हैं. लेकिन बेंगलुरु में एक ऐसा मामला सामने आया, जहां एक कैब ड्राइवर ने अपनी सवारी के लिए पूरे एक घंटे इंतजार किया और नाराज होने के बजाय उसे धन्यवाद कहा.

यह मामला गूगल के बेंगलुरु स्थित अनंत कैंपस से जुड़ा है. बेंगलुरु की राइटर और कोच तान्या माथुर भट्टाचार्या ने लिंक्डइन पर अपना एक्सपीरियंस शेयर किया. उनकी पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर कंपनियों के वर्कप्लेस कल्चर और कर्मचारियों के अलावा दूसरे लोगों के साथ व्यवहार को लेकर चर्चा शुरू हो गई.

एक घंटे तक करना पड़ा इंतजार:

तान्या गूगल के बेंगलुरु ऑफिस में ऐप डेवलपमेंट लीडर्स के लिए आयोजित एक वर्कशॉप में शामिल होने गई थीं. उन्होंने वापसी के लिए कैब ड्राइवर शरद को सुबह 11:30 बजे पिकअप के लिए बुलाया था. हालांकि, मीटिंग, कॉफी और लंच के कारण उन्हें कैब तक पहुंचने में करीब 12:30 बज गए. तान्या को लगा कि एक घंटे इंतजार करने के कारण शरद काफी नाराज होंगे. उन्होंने कैब में पहुंचते ही देरी के लिए माफी मांगी. लेकिन शरद ने जो जवाब दिया, वह उनके लिए हैरान करने वाला था. उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि देर होने के लिए धन्यवाद, क्योंकि उन्हें गूगल आना बहुत पसंद है.

गूगल कैंपस में ड्राइवरों के लिए खास व्यवस्था: 

तान्या ने जब इसकी वजह पूछी तो शरद ने गूगल के कैंपस में कैब ड्राइवरों के लिए मिलने वाली सुविधाओं के बारे में बताया. उनके मुताबिक, बाहर से आने वाले कैब ड्राइवरों के लिए कैंपस के बेसमेंट में अलग पार्किंग की व्यवस्था है. वहां उन्हें चाय, कॉफी और स्नैक्स भी मिलते हैं.

सबसे खास बात यह है कि ड्राइवरों के लिए तीनों समय फ्री खाना उपलब्ध कराया जाता है. शरद ने बताया कि उनसे कहा जाता है कि जितना खाना हो उतना लें, लेकिन खाना बर्बाद न करें. अगर किसी को और भूख लगे तो वह दोबारा खाना भी ले सकता है.

छोटी बात, लेकिन बड़ा मैसेज:

शरद ने बताया कि कई कंपनियां ड्राइवरों को बाहर खाना खाने के लिए पैसे देती हैं, लेकिन गूगल में उन्हें ऐसा महसूस कराया जाता है जैसे वे कंपनी के मेहमान हों. यही बात तान्या को सबसे ज्यादा प्रभावित कर गई. उन्होंने कहा कि किसी कंपनी का असली कॉर्पोरेट कल्चर सिर्फ उसके शानदार ऑफिस, बड़ी सैलरी या कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाओं से नहीं पता चलता.

असली वर्कप्लेस कल्चर क्या है?

तान्या के मुताबिक, किसी संगठन की असली संस्कृति इस बात से दिखाई देती है कि वहां कैब ड्राइवर, सिक्योरिटी गार्ड, हाउसकीपिंग स्टाफ और वेंडर्स जैसे लोगों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है. उनकी लिंक्डइन पोस्ट पर लोगों ने भी काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी. कई यूजर्स ने कहा कि किसी कंपनी की असली वैल्यू उसके बड़े-बड़े दावों से नहीं, बल्कि रोजमर्रा की छोटी-छोटी चीजों से दिखाई देती है.