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 30 साल में 3,100 करोड़ किए अंदर, घूसखोरी से अरबपति हुआ सरकारी अधिकारी; अब मिली सजा-ए-मौत

भ्रष्टाचार का एक ऐसा मामला, जिसे सुनकर आप हैरान हो जाएंगे. एक शख्स ने 30 साल में 31 अरब रुपये घूसखोरी से अर्जित किये. हालांकि इस मामले में जब उसे मौत की सजा सुनाई गई है तो लोग इस फैसले को नजीर के तौर पर देख रहे हैं.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: चीन में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत एक और बडी कार्रवाई सामने आई है. देश की अदालत ने पूर्व स्थानीय अधिकारी यांग योलिन को रिश्वतखोरी, गबन, पद के दुरुपयोग और मनी लान्ड्रिंग जैसे गंभीर मामलों में दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई है. अदालत ने उनके खिलाफ अवैध रूप से अर्जित संपत्ति जब्त करने और गैरकानूनी धन की वसूली के भी आदेश दिए हैं. यह फैसला चीन में भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी सख्त कार्रवाई का ताजा उदाहरण माना जा रहा है.

चांगझोउ इंटरमीडिएट पीपुल्स कोर्ट के अनुसार यांग योलिन ने वर्ष 1993 से 2023 के बीच अपने सरकारी पद का दुरुपयोग करते हुए करीब 2.21 अरब युआन की अवैध संपत्ति रिश्वत के जरिये हासिल की. यह रकम लगभग 325 मिलियन अमेरिकी डॉलर के बराबर बताई गई है. भारतीय मुद्रा में इसकी कीमत करीब 3 हजार करोड रुपये आंकी जा रही है.

अदालत ने माना कि यांग ने अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल कर कई लोगों और संस्थाओं को अनुचित लाभ पहुंचाया और बदले में भारी आर्थिक फायदा उठाया. जांच में गबन, मनी लान्ड्रिंग और पद के दुरुपयोग के आरोप भी साबित हुए.


अदालत में स्वीकार किया अपना अपराध

सुनवाई के दौरान यांग योलिन ने अपने अपराध स्वीकार कर लिए. अदालत के अनुसार उन्होंने अपने कृत्यों पर गहरा पछतावा भी जताया. हालांकि अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए उन्हें मौत की सजा सुनाई और उनकी अवैध संपत्ति जब्त करने का आदेश दिया.

चीन की न्याय व्यवस्था में आर्थिक अपराधों और भ्रष्टाचार के मामलों में कडी सजा का प्रावधान है. खासकर उन मामलों में जहां रिश्वत की रकम बेहद अधिक हो और सरकारी व्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचा हो.

शी चिनफिंग के अभियान के तहत हुई कार्रवाई

यह पूरा मामला राष्ट्रपति शी चिनफिंग के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का हिस्सा माना जा रहा है. पिछले कई वर्षों से चीन में उच्च अधिकारियों, सरकारी संस्थानों, सैन्य अधिकारियों और बैंकिंग क्षेत्र से जुडे लोगों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है.

सरकार का दावा है कि इस अभियान का मकसद प्रशासन को पारदर्शी बनाना और भ्रष्टाचार पर पूरी तरह रोक लगाना है. इसी अभियान के तहत कई वरिष्ठ अधिकारियों को सजा मिल चुकी है.

आलोचकों ने उठाए राजनीतिक सवाल

हालांकि इस अभियान को लेकर विवाद भी कम नहीं हैं. कई राजनीतिक विश्लेषकों और आलोचकों का मानना है कि भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का इस्तेमाल कई बार राजनीतिक विरोधियों को कमजोर करने या सत्ता से दूर करने के लिए भी किया जाता है.

इसके बावजूद चीन सरकार लगातार यह कहती रही है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उसकी नीति बिना किसी भेदभाव के लागू की जा रही है और कानून से ऊपर कोई नहीं है.

भ्रष्टाचार पर जीरो टालरेंस का संदेश

यांग योलिन को सुनाई गई मौत की सजा को चीन के सबसे सख्त भ्रष्टाचार मामलों में से एक माना जा रहा है. इस फैसले के जरिये चीन ने एक बार फिर साफ संकेत दिया है कि सरकारी पद का दुरुपयोग कर अवैध संपत्ति अर्जित करने वालों के खिलाफ कडी से कडी कार्रवाई की जाएगी. यह मामला केवल एक अधिकारी की सजा तक सीमित नहीं है, बल्कि चीन की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टालरेंस नीति का भी प्रतीक माना जा रहा है.