IIT Delhi के साथ योगी सरकार का मेगा प्रोजेक्ट, गांव-गांव पहुंचेगी बायोगैस

उत्तर प्रदेश सरकार गोबर आधारित ऊर्जा और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए हर जिले में मॉडल विलेज विकसित करने की तैयारी में है. इस अभियान में आईआईटी दिल्ली तकनीकी सहयोग देगा और ग्रामीणों को प्रशिक्षण भी प्रदान करेगा.

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Kuldeep Sharma

उत्तर प्रदेश में ग्रामीण विकास, स्वच्छ ऊर्जा और गो संरक्षण को एक साथ जोड़ने की दिशा में एक नई पहल शुरू की गई है. राज्य सरकार बायोगैस संयंत्रों के माध्यम से गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की योजना पर काम कर रही है. इस परियोजना में आईआईटी दिल्ली की तकनीकी विशेषज्ञता महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.

हर जिले में विकसित होगा मॉडल विलेज

राज्य सरकार ने प्रदेश के प्रत्येक जिले में एक मॉडल विलेज तैयार करने का लक्ष्य तय किया है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य गोबर का बेहतर उपयोग करते हुए बायोगैस और जैविक खाद का उत्पादन बढ़ाना है. सरकार चाहती है कि गांवों में उपलब्ध संसाधनों का उपयोग स्थानीय स्तर पर ही किया जाए, जिससे ग्रामीणों को ऊर्जा और खेती दोनों क्षेत्रों में लाभ मिल सके. इस मॉडल के जरिए प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन दिया जाएगा और किसानों की उत्पादन लागत कम करने का प्रयास होगा. साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ईंधन की उपलब्धता बढ़ने से पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है.

झांसी बना परियोजना का पहला उदाहरण

इस अभियान की शुरुआत झांसी जिले के ग्राम पलींदा से की गई है, जहां पहले चरण में 18 बायोगैस संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं. गांव को प्राकृतिक कृषि ग्राम के रूप में विकसित किया जा रहा है. योजना का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि अधिक से अधिक परिवारों तक गोबर गैस की सुविधा पहुंचे. इससे ग्रामीणों को पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी. साथ ही गोबर से तैयार होने वाली जैविक खाद खेतों की उर्वरता बढ़ाने में उपयोगी साबित होगी. सरकार इस मॉडल को सफल बनाकर अन्य जिलों में भी लागू करने की तैयारी कर रही है.


आईआईटी दिल्ली देगा तकनीकी मार्गदर्शन

परियोजना के तकनीकी पक्ष को मजबूत बनाने की जिम्मेदारी आईआईटी दिल्ली के विशेषज्ञों को सौंपी गई है. प्रोफेसर वीरेंद्र कुमार विजय के नेतृत्व में विशेषज्ञों और छात्रों की टीम ग्रामीणों को संयंत्रों की स्थापना, संचालन और रखरखाव संबंधी प्रशिक्षण दे रही है. उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग का मानना है कि इस पहल से किसानों को बेहतर गुणवत्ता की जैविक खाद उपलब्ध होगी और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटेगी. इसके साथ ही बाजार में रसायन मुक्त कृषि उत्पादों की उपलब्धता बढ़ेगी. सरकार का लक्ष्य गो संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक मजबूत मॉडल के रूप में विकसित करना है, जिससे गांवों की आत्मनिर्भरता को नई दिशा मिल सके.