आज के दौर में जहां संयुक्त परिवार तेजी से कम होते जा रहे हैं, वहीं आंध्र प्रदेश का नागप्पा परिवार इस परंपरा की अनोखी मिसाल पेश कर रहा है. अनंतपुर जिले के कुर्लापल्ली गांव में छह पीढ़ियों के 83 सदस्य एक साथ रहते हैं. परिवार चार आपस में जुड़े घरों में रहता है, लेकिन उनके बीच अलग-अलग घरों जैसी सीमाएं नहीं हैं. रसोई, भोजन, आमदनी, काम और बड़े फैसले सामूहिक रूप से लिए जाते हैं.
इतने बड़े परिवार के लिए खाना बनाना अपने आप में बड़ी व्यवस्था है. यहां रोज करीब 50 किलो चावल पकाया जाता है. परिवार की बहुएं मिलकर भोजन तैयार करती हैं, जबकि बुजुर्ग राशन और दूसरी जरूरतों की खरीदारी पर नजर रखते हैं. खास बात यह है कि सभी सदस्यों के लिए एक ही तरह का भोजन बनाया जाता है. चावल के साथ सब्जी और दलिया जैसी चीजें भी बड़ी मात्रा में तैयार होती हैं.
VIDEO | Anantpur, Andhra Pradesh: Six generations, 83 members; Nagappa family in Andhra Pradesh keeps the joint family legacy alive.
— Press Trust of India (@PTI_News) July 11, 2026
In an age of shrinking families, the Nagappa family in Kurlapalli village in Anantpur district of Andhra Pradesh stands as a rare example of… pic.twitter.com/kesZ5zgMJN
परिवार का हर दिन एक बैठक से शुरू होता है. सुबह चाय या कॉफी के दौरान बुजुर्ग सदस्य बैठकर पूरे दिन की जिम्मेदारियां तय करते हैं. किसे खेत पर जाना है, घर में कौन काम संभालेगा, राशन कब खरीदना है और भोजन में क्या बनेगा, जैसे फैसले इसी बैठक में लिए जाते हैं. इसके बाद परिवार के सदस्य अपनी-अपनी जिम्मेदारी संभाल लेते हैं. इस व्यवस्था से इतने बड़े परिवार का दैनिक काम व्यवस्थित तरीके से चलता है.
नागप्पा परिवार की आय का प्रमुख स्रोत खेती और परिवहन कारोबार है. परिवार करीब 120 एकड़ जमीन पर खेती करता है. इसके अलावा उसके पास चार बसें भी हैं, जो कल्याणदुर्गम और कर्नाटक के कुछ इलाकों के बीच चलती हैं. खेती और बस कारोबार से होने वाली आय को परिवार के स्तर पर साझा किया जाता है. घरेलू खर्च और अन्य जरूरतों का प्रबंधन भी सामूहिक आमदनी से किया जाता है.
परिवार के बुजुर्ग मुत्यालप्पा के मुताबिक, कभी उनका परिवार बेहद गरीबी में था. उनके पास पर्याप्त भोजन और कपड़े तक नहीं होते थे. उनका मानना है कि परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर काम करने से हालात बदले. सामूहिक मेहनत ने परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया. इसी वजह से नागप्पा परिवार आज भी अलग-अलग घरों में रहने के बावजूद अपनी आय और जीवनशैली को साझा रखना पसंद करता है.
परिवार के वरिष्ठ सदस्य हनुमंथा रायडू के अनुसार, पिता और दादा के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आई. वह बताते हैं कि परिवार के लोग एक-दूसरे का सहारा बनकर रहते हैं और अब तक बड़े मतभेदों से बचे हैं. 83 लोगों के लिए यह व्यवस्था आसान नहीं है, लेकिन साझा रसोई, सामूहिक निर्णय और काम का बंटवारा इसे संभव बनाते हैं. बच्चों को भी कई पीढ़ियों का साथ मिलता है, जिससे परिवार की एकजुटता बनी रहती है.