मुंबई में टैक्सी सेवा से जुड़ा एक वीडियो इन दिनों खूब चर्चा में है, जिसमें मराठी भाषा को लेकर यात्री और ड्राइवर के बीच बहस होती दिखाई दे रही है. यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब महाराष्ट्र सरकार ने ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी के व्यावहारिक ज्ञान को जरूरी करने की घोषणा की है. परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक के अनुसार यह नियम 20 अगस्त से लागू होगा. हालांकि वायरल वीडियो की तारीख और स्थान की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
वीडियो में आगे की सीट पर बैठा यात्री चालक से बात करने को कहता है. चालक उससे अंग्रेजी में बोलने के लिए कहता है. इसके बाद यात्री चार अंकों का ओटीपी मराठी में बताता है. चालक फिर नंबर दोहराने को कहता है और फोन डैशबोर्ड पर रखकर यात्री से खुद ओटीपी डालने को कहता है. इसके बाद बातचीत ऐप की भाषा और महाराष्ट्र में मराठी के इस्तेमाल को लेकर बहस में बदल जाती है.
महाराष्ट्र में कैब ड्राइवर यात्री में हुआ मराठी भाषा का विवाद। यात्री ओटीपी मराठी भाषा में बता रहा था,तो ड्राइवर बोला भाई इंग्लिश में बता न ओटीपी।😎
— सीतामढ़ी जिला 🇮🇳 (@SitamarhiJila) August 19, 2026
लेकिन वो बार-बार मराठी में बोल रहा था, तो ड्राइवर बोला ये ऐप बता किस भाषा में चलता है। मराठी भाषा में या इंग्लिश में उसके बाद बात… pic.twitter.com/WIX1aecRqN
बहस के दौरान चालक यात्री से पूछता है कि ऐप अंग्रेजी में है या मराठी में. यात्री जवाब में महाराष्ट्र में वाहन चलाने और राज्य की ओर से लाइसेंस मिलने की बात कहता है. इसके बाद वह अपने मोबाइल से किसी व्यक्ति को फोन करता है और वीडियो समाप्त हो जाता है. घटना के दौरान दोनों के बीच तनाव साफ दिखाई देता है.
इस वीडियो को लेकर घटना की सटीक तारीख और स्थान की जानकारी सामने नहीं आई है. जिस ऐप आधारित टैक्सी में यह विवाद हुआ, उसका नाम भी स्पष्ट नहीं है. इसलिए वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद चर्चा में आया. ऐसे में घटना से जुड़े दावों को पूरी तरह सत्यापित तथ्य मानने से पहले आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना जरूरी है.
महाराष्ट्र मोटर वाहन संशोधन नियमों के तहत ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं के चालकों के लिए मराठी का व्यावहारिक ज्ञान अनिवार्य किया गया है. इसमें ओला, उबर और रैपिडो जैसी सेवाओं से जुड़े चालक भी शामिल हैं. नियम में एग्रीगेटर कंपनियों और उनके चालकों को कोई अलग छूट नहीं दी गई है. सरकार के इस फैसले का उद्देश्य राज्य में टैक्सी और ऑटो सेवाओं से जुड़े चालकों के लिए मराठी भाषा की समझ सुनिश्चित करना बताया गया है.