जिसे 4 साल रक्षक समझकर पाला, वही निकला दुश्मन! पिटबुल चबा गया मालकिन का आधा चेहरा

अमेरिका में 25 वर्षीय कर्मा डेविस को मिर्गी का दौरा पड़ा तो उनका चार साल पुराना पालतू पिटबुल फेजो उनके चेहरे पर टूट पड़ा. बेसुध महिला का आधा चेहरा चबा गया. अस्पताल में तीन दिन कोमा में रखना पड़ा और कई सर्जरी हुईं. 

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Kuldeep Sharma

पालतू जानवरों को परिवार का सदस्य मानना आम बात है, लेकिन कभी-कभी यही प्यार खतरनाक साबित हो जाता है. अमेरिका के इलिनोइस राज्य की 25 वर्षीय कर्मा डेविस के साथ जो हादसा हुआ, उसे सुनकर किसी की भी रूह कांप जाएगी. उन्होंने चार साल से ‘फेजो’ नाम का पिटबुल पाला था, जिसे वे बहुत लाड से रखती थीं. 2 मार्च को जब कर्मा को मिर्गी का दौरा पड़ा और वे बेसुध होकर गिर पड़ीं, तब घर में सिर्फ यही कुत्ता मौजूद था. मदद करने की बजाय कुत्ते ने अपनी मालकिन के चेहरे पर हमला कर दिया.

बीमार मालकिन पर पिटबुल का हमला

कर्मा डेविस रसोई में कपकेक खा रही थीं कि अचानक उन्हें दौरा पड़ा. वे बेहोश हो गईं. चार साल से साथ रहने वाला पिटबुल फेजो उस वक्त अपनी शिकारी प्रवृत्ति नहीं रोक सका. उसने महिला के चेहरे को नोंचना शुरू कर दिया. जब कर्मा को होश आया तो चारों तरफ खून बिखरा हुआ था. उनका आधा चेहरा बुरी तरह घायल हो चुका था. होंठ, बायां गाल, नाक का निचला हिस्सा और कान का एक भाग कुत्ते ने चबा लिया था. दाहिना कान आंशिक रूप से फट गया था, जिसे बाद में सर्जरी से जोड़ा गया. यह घटना पिटबुल जैसी मजबूत नस्ल के कुत्तों की अप्रत्याशित फितरत को उजागर करती है.

वीडियो कॉल पर खुला खौफनाक सच

होश आने के बाद कर्मा ने जैसे-तैसे अपने पति को मैसेज किया. पति ने घबराकर वीडियो कॉल की तो दोनों स्तब्ध रह गए. स्क्रीन पर कर्मा का चेहरा देखकर उनकी हालत खराब हो गई. आधा चेहरा लगभग गायब था. अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने उन्हें तीन दिन के लिए कोमा में रखा. कई घंटों की सर्जरी के बाद उनकी जान तो बच गई, लेकिन चेहरे की मांसपेशियां और बनावट को ठीक करने में लंबा समय लगेगा. फिलहाल वे ट्यूब से खाना खा रही हैं और प्लास्टिक सर्जरी का सिलसिला चल रहा है. यह हादसा दिखाता है कि मिर्गी जैसे रोग से जूझ रहे लोगों को पालतू जानवरों के साथ अकेले रहते समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए.

चार साल का साथ, फिर अचानक हिंसा

कर्मा डेविस इस कुत्ते को पिछले चार साल से पाल रही थीं. वे उसे परिवार का सदस्य मानती थीं. हादसे के बाद कुत्ते को पकड़ लिया गया और उसे इच्छामृत्यु दे दी गई. कर्मा अब भी सदमे में हैं. वे कहती हैं कि कुत्ते की याद आती है, लेकिन उसे दोबारा घर लाने का ख्याल भी उन्हें डराता है. यह घटना जानवरों की फितरत पर सवाल उठाती है. विशेषज्ञों का मानना है कि पिटबुल जैसी मजबूत और आक्रामक नस्ल के कुत्तों को पालते समय ट्रेनिंग, निगरानी और मालिक की स्वास्थ्य स्थिति का विशेष ध्यान रखना जरूरी है. छोटी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है.