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ट्रेन की पटरियों में गैप क्यों? ये छोटी-सी जगह बचा रही है लाखों यात्रियों की जान

ट्रेन में सफर करते समय आपने अक्सर रेलवे ट्रैक पर पटरियों के बीच छोटे-छोटे गैप जरूर देखे होंगे. कई लोगों के मन में यह सवाल आता है कि आखिर जब ट्रैक को मजबूत बनाना होता है, तो फिर पटरियों को पूरी तरह जोड़कर क्यों नहीं बिछाया जाता?

Meenu Singh
Edited By: Meenu Singh
ट्रेन की पटरियों में गैप क्यों? ये छोटी-सी जगह बचा रही है लाखों यात्रियों की जान
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: ट्रेन में सफर करते समय आपने अक्सर रेलवे ट्रैक पर पटरियों के बीच छोटे-छोटे गैप जरूर देखे होंगे. कई लोगों के मन में यह सवाल आता है कि आखिर जब ट्रैक को मजबूत बनाना होता है, तो फिर पटरियों को पूरी तरह जोड़कर क्यों नहीं बिछाया जाता? दरअसल, यह कोई कमी नहीं बल्कि यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ी एक महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग तकनीक है, जो बड़े रेल हादसों को रोकने में अहम भूमिका निभाती है.

भारतीय रेलवे के ट्रैक मुख्य रूप से स्टील से बनाए जाते हैं. विज्ञान के अनुसार स्टील जैसी धातुएं गर्मी मिलने पर फैलती हैं और ठंड में सिकुड़ जाती हैं. यही कारण है कि रेलवे इंजीनियर पटरियों के बीच थोड़ी जगह छोड़ते हैं, ताकि तापमान बढ़ने पर ट्रैक सुरक्षित तरीके से फैल सके और उसकी संरचना पर अतिरिक्त दबाव न पड़े.

थर्मल एक्सपैंशन का होता है असर

रेलवे पटरियों के बीच छोड़ा गया गैप सीधे तौर पर 'थर्मल एक्सपैंशन' के सिद्धांत पर आधारित है. गर्मियों में तेज धूप और लगातार ट्रेनों के गुजरने से ट्रैक का तापमान काफी बढ़ जाता है. ऐसे में स्टील फैलने लगता है. अगर पटरियों के बीच जगह न हो, तो फैलाव के कारण ट्रैक पर अत्यधिक दबाव बनने लगता है.

गैप न होने पर बढ़ सकता है हादसे का खतरा

विशेषज्ञों के मुताबिक अगर पटरियों के बीच पर्याप्त गैप न छोड़ा जाए, तो ट्रैक मुड़ सकता है. इस स्थिति को तकनीकी भाषा में 'बकलिंग' कहा जाता है. मुड़ी हुई पटरी पर ट्रेन का संतुलन बिगड़ सकता है और इससे ट्रेन के पटरी से उतरने का खतरा पैदा हो सकता है. यही वजह है कि छोटे-से दिखने वाले ये गैप रेल सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी माने जाते हैं.

आधुनिक तकनीक से और सुरक्षित हुआ रेल ट्रैक

आज के समय में भारतीय रेलवे कई जगहों पर लंबी दूरी वाले वेल्डेड ट्रैक का इस्तेमाल कर रही है. इन्हें खास तकनीक के जरिए इस तरह डिजाइन किया जाता है कि ट्रैक पर पड़ने वाले दबाव को संतुलित किया जा सके. इसके अलावा रेलवे अब मैग्नेटिक पार्टिकल टेस्टिंग जैसी आधुनिक जांच तकनीकों का भी इस्तेमाल कर रही है, ताकि वेल्डिंग और ट्रैक की गुणवत्ता बेहतर बनी रहे.

यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ी अहम तकनीक

रेलवे ट्रैक पर दिखने वाले ये छोटे गैप भले ही साधारण लगें, लेकिन इनके पीछे गहरी वैज्ञानिक सोच और इंजीनियरिंग का बड़ा योगदान है. यही तकनीक लाखों यात्रियों के सफर को सुरक्षित और सुगम बनाने में मदद करती है.