ITR फाइल करते वक्त ना करें ये गलतियां, अटक जाएगा रिफंड


Shanu Sharma
20 May 2026

इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म

    इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म भरने का समय शुरू हो चुका है. लाखों टैक्सपेयर्स इस बार भी जल्द से जल्द अपना रिटर्न भरकर रिफंड पाने की उम्मीद कर रहे हैं.

आयकर विभाग

    आयकर विभाग अब हर जानकारी की बारीकी से जांच करता है. इसलिए रिटर्न फाइल करते समय सावधानी बरतना बहुत जरूरी है.

डिफेक्टिव रिटर्न

    यहां बताई जा रही हैं ITR फाइलिंग की वो 5 आम गलतियां जो अक्सर रिफंड में देरी या डिफेक्टिव रिटर्न का कारण बन जाती हैं.

ई-वेरिफिकेशन

    बहुत से लोग सोचते हैं कि ITR पोर्टल पर सबमिट बटन दबाते ही उनका काम पूरा हो गया. यह सबसे बड़ी गलती है. जब तक आप अपना रिटर्न ई-वेरिफाई नहीं कर लेते, विभाग उसे वैध नहीं मानता. रिटर्न फाइल करने के 30 दिनों के अंदर ई-वेरिफिकेशन जरूर करें.

गलत या वैलिडेट न किया गया बैंक खाता

    रिफंड सीधे बैंक खाते में आने की उम्मीद है तो सबसे पहले अपने बैंक डिटेल्स जांच लें. रिफंड केवल उसी खाते में भेजा जाता है जो आपके PAN से लिंक हो और इनकम टैक्स पोर्टल पर प्री-वैलिडेटेड हो.

AIS, 26AS और फॉर्म 16 से डेटा मिसमैच

    यह रिफंड अटकने का सबसे आम कारण है. आयकर विभाग के पास आपकी सारी आय, TDS, ब्याज, शेयर ट्रांजेक्शन आदि का पूरा डेटा AISऔर फॉर्म 26AS में उपलब्ध होता है. अगर ITR में आपने जो आंकड़े भरे हैं वे इन दस्तावेजों से मैच नहीं करते, तो सिस्टम ऑटोमैटिक रूप से फाइल को फ्लैग कर देता है.

गलत या ज्यादा TDS क्लेम करना

    कई टैक्सपेयर्स एम्प्लॉयर या बैंक द्वारा कटे TDS का क्लेम तो कर देते हैं, लेकिन यह जांचना भूल जाते हैं कि वह राशि उनके 26AS में अपडेट हुई है या नहीं. हमेशा 26AS में दर्ज TDS ही क्लेम करें.

गलत ITR फॉर्म चुनना

    आयकर विभाग ने अलग-अलग आय स्रोतों और टैक्सपेयर्स के लिए अलग-अलग फॉर्म बनाए हैं. गलत फॉर्म चुनना आपके रिटर्न को तुरंत डिफेक्टिव बना देता है.

ई-वेरिफिकेशन

    ITR फाइल करने से पहले सभी दस्तावेजों को ध्यान से चेक करें, सही फॉर्म चुनें और समय पर ई-वेरिफिकेशन जरूर पूरा करें. सही और सटीक रिटर्न भरने से न सिर्फ रिफंड जल्दी मिलेगा बल्कि नोटिस से भी बचाव होगा.

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