PAN: आधार कार्ड की ही तरह पैन कार्ड भी बहुत ही जरूरी डाक्यूमेंट होता है. पैन के बिना कोई भी बड़ी वित्तीय लेन-देन नहीं हो पाती है. बैंक अकाउंट की सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए पैन की जरूरत पड़ती है. पैन हमारा एक पहचान पत्र होता है. जैसे आधार कार्ड में नंबर होता है. ठीक उसी प्रकार पैन में भी एक परमानेंट नंबर होता है. इसलिए पैन को परमानेंट अकाउंट नंबर कहते हैं. पैन नंबर में अल्फाबेट और न्यूमेरिक दोनों वैल्यू होती है.
अगर आपको लोन चाहिए तो भी पैन की जरूरत पड़ती है. बिना पैन कार्ड के लोन भी नहीं मिलता. पैन कार्ड में व्यक्ति का नाम लिखा होता है. परमानेंट अकाउंट नंबर, जन्मतिथि और पता लिखा होता है. इसके साथ आपकी फोटो और साइन होता है. इसी में एक ऐसा राज छिपा होता है जो बहुत कम लोगों को ही पता होता है.
जब आप गौर से अपना पैन कार्ड देखें तो पैन कार्ड में आपको अल्फाबेट और न्यूमेरिक वैल्यू दिखेगी.10 अंको का पैन नंबर होता है. इसमें पांचवा नंबर बहुत खास होता है. यही राज है. पैन कार्ड के पांचवा नंबर आपके सरनेम का पहला अक्षर होता है. अगर आपका नाम अमन सिंह है. तो आपके पैन कार्ड का पांचवा नंबर S होगा. अगर आपको यकीन नहीं हो रहा है तो एक बार अपना पैन कार्ड जरूर चेक करें.
पैन कार्ड आयकर विभाग जारी करता है. इसी की मदद से कर वसूला जाता है. अगर आपने एक बार पैन कार्ड अपने बैंक अकाउंट से लिंक कर दिया तो उसके बाद किए गए हर ट्रांजैक्शन की डिटेल आयकर विभाग के पास होती है. आपके बैंक खाते में गर ज्यादा पैसों का ट्रांजैक्शन नजर आता है तो आप आयकर विभाग के रडार में आ सकते हैं.