नई दिल्ली: 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण केंद्रीय बजट 2026 पेश करेंगी. इस बजट में विभिन्न क्षेत्रों के लिए घोषणाएं होंगी, जो अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने का लक्ष्य रखेंगी. बीमा क्षेत्र विशेष रूप से उत्सुक है, क्योंकि बढ़ते मेडिकल खर्च, ऊंचे प्रीमियम और अपर्याप्त कवरेज की चुनौतियां बनी हुई हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार इन मुद्दों पर ध्यान देकर आम आदमी को राहत प्रदान कर सकती है, साथ ही बीमा कंपनियों को प्रोत्साहन मिलेगा.
देश में चिकित्सा व्यय दिन-ब-दिन महंगे होते जा रहे हैं. आयकर अधिनियम की धारा 80डी के अंतर्गत स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर मिलने वाली 25 हजार रुपये की कर कटौती लंबे समय से अपरिवर्तित है. यह राशि अब आम परिवारों की जरूरतों के अनुरूप नहीं लगती. बजट में इस सीमा को 50 हजार रुपये तक बढ़ाने की उम्मीद की जा रही है, जिससे लोग अधिक बीमा कवर ले सकेंगे और कर बचत भी बढ़ेगी.
देश में अधिकांश लोगों के पास पर्याप्त जीवन बीमा सुरक्षा नहीं है. अध्ययनों से पता चलता है कि लगभग 17 ट्रिलियन डॉलर का मृत्यु सुरक्षा अंतर मौजूद है, मतलब आवश्यक जीवन बीमा की तुलना में 83 प्रतिशत आवश्यकताएं पूरी नहीं हो पाई हैं. यह स्थिति आर्थिक असुरक्षा को बढ़ाती है. सरकार को इस कमी को दूर करने के लिए नीतियां बनानी चाहिए, ताकि परिवारों की वित्तीय सुरक्षा मजबूत हो.
टर्म बीमा एक सस्ता और प्रभावी विकल्प है, लेकिन इसका प्रसार कम है. स्वास्थ्य बीमा पर दी जाने वाली कर छूट के अलावा टर्म बीमा प्रीमियम के लिए अलग से कर लाभ प्रदान किया जाना चाहिए. इससे लोग अधिक संख्या में टर्म प्लान खरीदेंगे, जिससे समग्र बीमा पैठ बढ़ेगी और परिवारों को अप्रत्याशित घटनाओं से सुरक्षा मिलेगी.जीएसटी में बदलाव की मांगबीमा क्षेत्र लंबे समय से जीएसटी से संबंधित सुधारों की मांग कर रहा है. कंपनियां सिर्फ छूट नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र को शून्य-दर वाली श्रेणी में रखने की अपेक्षा करती हैं. इससे वे दैनिक खर्चों पर चुकाए गए कर का इनपुट क्रेडिट ले सकेंगी, जिसका बोझ प्रीमियम पर नहीं पड़ेगा. नतीजतन, ग्राहकों को सस्ते प्रीमियम मिलेंगे और बीमा अधिक सुलभ बनेगा.
इन बदलावों से बीमा क्षेत्र में वृद्धि की संभावना है. आम लोग कम खर्च में बेहतर कवरेज प्राप्त कर सकेंगे, जबकि कंपनियां अधिक कुशलता से काम करेंगी. बजट 2026 में यदि ये घोषणाएं होती हैं, तो स्वास्थ्य और जीवन सुरक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आएगा, जो अंततः देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगा.