कैसे बनता है दिव्यांगता सर्टिफिकेट, जिस पर बुरी फंसी हैं IAS पूजा खडेकर?
मेडिकल बोर्ड की टीम सुनिश्चित की गई तारीख पर सदर अस्पताल सहित सभी प्रखंड के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मेडिकल बोर्ड कैंप लगाकर जांच करती है. सदर अस्पताल में जो कान से नहीं सुनते हैं और दिमाग से हल्के हैं उन्हीं लोगों का प्रमाण पत्र बनाया जाता है, जबकि अन्य व्यक्ति का प्रमाण पत्र प्रखंड स्वास्थ्य केंद्र में बनाया जाता है. ऑनलाइन और ऑफलाइन वाले व्यक्ति यहां से भी सर्टिफिकेट प्राप्त कर सकते हैं.
केंद्र सरकार की ओर से ऐसी कई योजनाओं आम लोगों के लिए चलाई जाती है जिससे उनको आर्थिक रूप से मदद मिल सके. इसी कड़ी में सरकार दिव्यांगों के लिए कई योजनाएं संचालित कर रही है लेकिन इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए दिव्यांगता प्रमाण पत्र जरूरी होता है. जिसके आधार पर पेंशन, रेल यात्रा में रियायत सहित नौकरी में भी छूट का लाभ उठा सकते हैं. इसको बनवाने की प्रक्रिया बहुत आसान है.
दिव्यांग व्यक्ति प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए अपने नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर सप्ताह में किसी एक दिन जा कर पता कर सकते हैं. जहां मेडिकल बोर्ड में शामिल लोग मौजूद रहते हैं, वहीं जो आंख से नहीं देख पाते हैं उनके लिए सदर अस्पताल के ओपीडी में लगे कैंप पर जाकर भी इसे बनवा सकते हैं.
कैसे बनता है दिव्यांगता सर्टिफिकेट?
अगर कोई व्यक्ति अपना दिव्यांग सर्टिफिकेट बनवाना चाहता है. तो वह अपने जिले के अस्पताल या फिर उस हास्पीटल से संपर्क कर सकते हैं, जहां उसने दिव्यांगता का इलाज कराया हो, इसके बाद उस व्यक्ति को एक मेडिकल बोर्ड के सामने पेश होना पड़ता है. मेडिकल बोर्ड में एक से ज्यादा डॉक्टर अधिकारी शामिल हो सकते हैं. इसके बाद वह दिव्यांगता की गंभीरता, स्थायीता को जांच करते हैं और पूरा आंकलन के बाद दिव्यांग व्यक्ति को प्रमाण पत्र जारी करते हैं.
दिव्यांगता सर्टिफिकेट ऑनलाइन ऐसे बनवाएं
- अगर आप ऑनलाइन बनवाना चाहते हैं तो इसके लिए आपको सबसे पहले UDID यानी यूनिक डिसेबिलिटी आईडी बनवाना होगा.
- आधिकारिक यूडीआईडी वेबसाइट (swavlambancard.gov.in) पर नेविगेट करें
- यूडीआईडी पोर्टल पर खाता बनाने के लिए रजिस्टर विकल्प पर क्लिक करें
- अपनी व्यक्तिगत जानकारी, विकलांगता की जानकारी, रोजगार की जानकारी (यदि लागू हो), और पहचान की जानकारी दर्ज करें. UDID पोर्टल पर खाता बनाने के लिए Register विकल्प पर क्लिक करें.
- प्रासंगिक कागजात अपलोड करें और जमा करें.
- एक बार पंजीकृत होने के बाद, आप अपने पंजीकृत मोबाइल फोन और ईमेल पते पर लॉगिन क्रेडेंशियल (नामांकन संख्या/यूडीआईडी संख्या) प्राप्त करेंगे.
- नामांकन संख्या/यूडीआईडी संख्या और जन्म तिथि का उपयोग करके, लॉग इन करें और फिर विकलांगता प्रमाणपत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन करें पर क्लिक करें
- आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें और सीएमओ कार्यालय/चिकित्सा प्राधिकरण को डेटा जमा करें
- सीएमओ कार्यालय / चिकित्सा प्राधिकरण डेटा की पुष्टि करता है और मूल्यांकन के लिए संबंधित विशेषज्ञ (विशेषज्ञों) को नियुक्त करता है.
- विशेषज्ञ चिकित्सक उम्मीदवारों की बाधाओं का मूल्यांकन करेगा और अपनी राय प्रदान करेगा.
- मामले का बाद में मेडिकल बोर्ड द्वारा मूल्यांकन किया जाता है, जो विकलांगता का प्रतिशत निर्धारित करता है.
- सीएमओ कार्यालय विकलांग प्रमाण पत्र और यूडीआईडी बनाता है, जिसके बाद विकलांग व्यक्तियों को यूडीआईडी कार्ड भेजा जाता है.
बुरी फंसी हैं IAS पूजा खडेकर
बता दें कि दिव्यांग सर्टिफिकेट सरकार के द्वारा उन लोगों के लिए चलाई जाती है जो शरीर से किसी ना किसी रूप में असमर्थ हैं तो उनके इस कोटे से छूट दी जाती है लेकिन ट्रेनी IAS पूजा खेडकर ने इसी दिव्यांग सर्टिफिकेट का फायदा उठाकर UPSC अटेंप्ट दिया और पास हो गई. हालांकि LBSNAA ने उनकी ट्रेनिग रद्द कर दी है. पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है.