Business News: मॉइक्रोसॉफ्ट के सर्वर में आई तकनीकी खराबी का असर पूरी दुनिया में देखने को मिला. इस तकनीकी खराबी के कारण दुनियाभर में कई उड़ानें रद्द कर दी गईं, दुनिया भर के स्टॉक एक्सचेंज का कारोबार प्रभावित हुआ लेकिन भारत के स्टॉक मार्केट नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर इस तकनीकी खराबी का बिल्कुल भी असर नहीं हुआ, जबकि लंदन स्टॉक एक्सचेंज और हांगकांग स्टॉक एक्सचेंज को इस तकनीकी खराबी का सामना करना पड़ा.
हैरान कर देंगे आंकड़े
ऐसे में आइए जानते हैं कि भारत का स्टॉक एक्सचेंज और रेगुलेटर तकनीकी सुरक्षा पर कितना पैसा खर्च करता है? ये आंकड़े आपको हैरान कर सकते हैं. बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, एनएसई IT पर 570 करोड़ रुपए खर्च करता है, जबकि लंदन स्टॉक एक्सचेंज (LSEG) 6,556 करोड़, NASDAQ 1,949 करोड़, जबकि हांगकांग स्टॉक एक्सचेंज (HKEX) आईटी पर सबसे ज्यादा 6,807 करोड़ रुपए खर्च करता है.
क्या होती है पूरी लागत
अब बात कर लेते हैं पूरी लागत की, जिसमें आईटी समेत बाकी खर्च भी शामिल होते हैं. तो एनएसई का पूरा खर्च 3,036 करोड़, NASDAQ का पूरा खर्च 23,734 करोड़ और जबकि HKEX का पूरा खर्च 69,313 करोड़ रुपए है.
कितनी होती है कमाई
कमाई के मामले में एनएसई बाकी स्टॉक एक्सचेंज से कहीं पीछे है. एनएसई का कुल राजस्व 12,692 करोड़, NASDAQ को 32,574 करोड़ और HKEX का कुल 171,575 राजस्व करोड़ रुपए है.
मार्केट रेग्यूलेटर SEBI आई पर कितना खर्च करता है
बाजार नियामक सेबी का आईटी पर कुल खर्च 93 करोड़ है जोकि ऑस्ट्रेलिया के बाजार नियामक ASIC 205 करोड़ और सिंगापुर के बाजार नियामक MAS के 420 करोड़ से काफी कम है. भारत के एक्सचेंज और रेगुलेटर तकनीक पर अन्य देशों से कम खर्च करते हैं बावजूद इसके भारत का बाजार प्रभावित नहीं हुआ.
वैश्विक प्रणाली पर निर्भरता एक बुरा विचार
प्रधान मंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के सदस्य संजीव संज्याल ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा, 'यही कारण है कि आनुवांशिक विविधता महत्वपूर्ण है. एक ही वैश्विक प्रणाली पर निर्भरता एक बुरा विचार है. एक कम परस्पर जुड़ी प्रणाली अक्षम दिखाई दे सकती है लेकिन यह अधिक लचीली होगी. यह एआई रेगूलेशन के लिए कॉम्प्लेक्स एडप्टिव सिस्टम्स का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष है.'
Microsoft glitch causes global shutdown of banks, financial markets, flights ........ This is why genetic diversity is important. A unified, interconnected global system is a bad idea. A less interconnected system may appear inefficient but will be more resilient. This is an…
— Sanjeev Sanyal (@sanjeevsanyal) July 19, 2024
उन्होंने सुझाव दिया कि इस तरह की तकनीकी खामी के प्रभाव से बचने के लिए हमें AI को रेगुलेट करने का फ्रेमवर्क तैयार करना होगा इसके अलावा हमें वैश्विक प्रणाली पर निर्भर रहने के बजाय अपनी खुद की एल्गोरिदम विकसित करनी होगी.
उन्होंने अपने रिसर्च पेपर EAC-PM में लिखा कि AI सिस्टम CAS की तरह काम करते हैं, वे ऐसे घटकों के साथ काम करते हैं जो अप्रत्याशित तरीकों परस्पर क्रिया करते हैं और विकसित होते हैं. यह जटिलता बुरी तरह प्रभावित कर सकती है और इसके बेहद खतरनाक परिणाम देखने को मिल सकते हैं.