नई दिल्ली: वित्तीय वर्ष 2026 के समाप्त होने में अब कुछ ही घंटे बचे हैं. कल यानी 1 अप्रैल 2025 से नया वित्तीय वर्ष 2027 शुरू होते ही देश में नया इनकम टैक्स कानून लागू हो जाएगा. यह कानून 1961 के पुराने कानून की जगह लेगा और इसे इनकम टैक्स एक्ट 2025 के नाम से जाना जाएगा. नए कानून का मुख्य उद्देश्य कर ढांचे को सरल बनाना, निवेश के माहौल को बेहतर बनाना और आईटीआर फाइलिंग तथा विदेशी खर्चों से जुड़े नियमों में पारदर्शिता लाना है. आइए जानते हैं इन 10 अहम बदलावों के बारे में:
अब तक आईटीआर भरते समय वित्तीय वर्ष (Financial Year) और निर्धारण वर्ष (Assessment Year) का भ्रम रहता था. नए कानून में इस कन्फ्यूजन को दूर करते हुए इसे सिर्फ 'टैक्स वर्ष' (Tax Year) कर दिया गया है.
सैलरी कर्मचारियों के लिए आईटीआर-1 और आईटीआर-2 जमा करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई ही रहेगी. वहीं, स्वरोजगार करने वालों और व्यवसायियों के लिए राहत भरी खबर है. अब आईटीआर-3 और आईटीआर-4 जमा करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त कर दी गई है.
डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग अब पहले से महंगी हो गई है. सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोतरी की गई है. फ्यूचर और ऑप्शन (F&O) पर STT 0.02 फीसदी से बढ़ाकर 0.05 फीसदी कर दिया गया है. वहीं, ऑप्शन प्रीमियम पर टैक्स और ऑप्शन पर एक्ससाइज 0.1 फीसदी और 0.125 फीसदी से बढ़कर 0.15 फीसदी हो जाएगा.
मकान किराया भत्ता (HRA) का लाभ तो मिलेगा, लेकिन इसके लिए अनुपालन सख्त कर दिया गया है. कर्मचारियों को अब मकान मालिक का पैन (PAN) नंबर और किराए के भुगतान का वैध प्रमाण देना अनिवार्य होगा.
कंपनी की ओर से दिए जाने वाले फूड कार्ड (मील कार्ड) पर टैक्स छूट की सीमा 50 रुपये प्रति मील से बढ़ाकर 200 रुपये कर दी गई है. इसके अलावा, कंपनी की ओर से मिलने वाले गिफ्ट कार्ड, वाउचर और कूपन पर सालाना टैक्स फ्री लिमिट हर कर्मचारी के लिए 5,000 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये कर दी गई है.
शेयर बायबैक पर अब पहले की तरह स्लैब रेट से टैक्स नहीं लगेगा, बल्कि इसे कैपिटल गेन के तौर पर देखा जाएगा. वहीं, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) में भी बड़ा बदलाव हुआ है. अब सेकेंडरी मार्केट से खरीदे गए एसजीबी के रिडेम्पशन पर कैपिटल गेन टैक्स लगेगा. छूट केवल आरबीआई की योजना से खरीदे गए बॉन्ड पर ही मिलेगी.
विदेश यात्राओं पर सोर्स पर टैक्स कलेक्शन (TCS) में राहत दी गई है. पहले 10 लाख रुपये तक 5 फीसदी और इससे अधिक पर 20 फीसदी टीसीएस लगता था. अब कुल लागत पर 2 फीसदी की फ्लैट दर लागू होगी. शिक्षा और चिकित्सा यात्राओं के लिए भी यह दर घटाकर 2 फीसदी कर दी गई है.
अब सिर्फ आधार कार्ड के आधार पर पैन कार्ड के लिए आवेदन करना मान्य नहीं होगा. आवेदकों को अन्य दस्तावेज भी देने होंगे. साथ ही, 10 लाख रुपये से अधिक के कैश जमा, 5 लाख रुपये से अधिक के वाहनों की खरीद और 20 लाख रुपये से अधिक की अचल संपत्ति के लेन-देन पर पैन अनिवार्य कर दिया गया है.
अनिवासी भारतीयों (NRI) से जुड़ी संपत्ति के लेन-देन में अब खरीदार अपने पैन से टीडीएस काट सकेंगे, जिससे टीएएन (TAN) लेने की जरूरत नहीं रहेगी. वहीं, मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण से मिलने वाले मुआवजे पर मिला ब्याज अब पूरी तरह टैक्स फ्री होगा.